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Mahashivratri 2023: यहां चकनाचूर होकर फिर जुड़ जाता है शिवलिंग, इस महाशिवरात्रि करें दर्शन

Sat, 18 Feb 2023 12:51 AM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रुति गौड़ Updated Sat, 18 Feb 2023 12:51 AM IST
सार

भोलेनाथ का ये मंदिर कुल्लू घाटी के सुंदर गांव काशवरी में स्थित है, जो 2460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसे भारते के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है।

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Mahashivratri 2023 Bijli Mahadev Temple History and Unknown Facts in Hindi
यहां चकनाचूर होने के बाद फिर जुड़ जाता है शिवलिंग - फोटो : instagram

Mahashivratri 2023 : हिमाचल एक ऐसा राज्य है, जो अपने प्राकृतिक अजूबों के साथ-साथ अपनी सुंदरता की वजह से काफी चर्चित है। यहां लोग बर्फ का लुफ्त उठाने जाते हैं। पर, क्या आप जानते हैं कि हिमाचल के कुल्लू में एक ऐसा शिव मंदिर है जिसका धार्मिक महत्व काफी ज्यादा है। इस रहस्यमयी मंदिर के बारे में हर कोई जानता है। लोग दूर-दूर से यहां दर्शन के लिए आते हैं।



भोलेनाथ का ये मंदिर कुल्लू घाटी के सुंदर गांव काशवरी में स्थित है, जो 2460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसे भारते के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर का इतिहास काफी रहस्यमयी है। ऐसी मान्यता है कि, यहां स्थित शिवलिंग बिजली गिरने के बाद पूरी तरह टूट जाता है। पर, कुछ ही समय में वह जुड़ भी जाता है। आइए आपको भी इस शिव मंदिर के अनोखे इतिहास के बारे में बताते हैं, जिसे सुनकर आपका मन भी वहां जाने का करने लगेगा।

Mahashivratri 2023 Bijli Mahadev Temple History and Unknown Facts in Hindi
जानें क्या है रहस्यमयी बिजली ? - फोटो : istock

जानें क्या है रहस्यमयी बिजली ?

ऐसी मान्यता है कि, हर 12 साल में मंदिर के अंदर स्थित शिवलिंग पर रहस्यमय तरीके से बिजली टकराती है। जिसकी वजह से शिवलिंग के कई टुकड़े हो जाते हैं। इसके बाद मंदिर के पुजारी हर टुकड़ों को इकट्ठा करके उन्हें अनाज, दाल के आटे और कुछ मक्खन से बने पेस्ट के उपयोग से जोड़ते हैं। कुछ समय बीतने के बाद शिवलिंग पहले जैसा लगने लगता है। मान्यता ये भी है कि यहां हर मनोकामना पूरी होती है। 

Mahashivratri 2023 Bijli Mahadev Temple History and Unknown Facts in Hindi
क्या है लोगों का मानना ? - फोटो : istock

क्या है लोगों का मानना ?

लोगों की मानें तो पीठासीन देवता इलाके के लोगों को हर बुराई से बचाना चाहते हैं। इसके चलते शिवलिंग से बिजली टकराती है। कई लोगों का ये भी कहना है कि, ये बिजली एक दिव्य आशीर्वाद है, इसमें कई तरह की शक्तियां होती हैं। 

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Mahashivratri 2023 Bijli Mahadev Temple History and Unknown Facts in Hindi
पौराणिक कथा - फोटो : instagram

पौराणिक कथा 

ऐसा कहा जाता है कि, कुल्लु घाटी में एक कुलंत नाम का राक्षस रहता था। एक दिन वो रूप बदल कर विशालकाय सांप बन गया। इसके बाद वो लाहौल-स्पीति के मथन गांव पहुंच गया। यहां उसने ब्यास नदी के प्रवाह को रोकने की कोशिश की, जिस वजह से गांव में बाढ़ आ गई। भगवान शिव ने जब ये देखा तो वो उसे रोकने आए। कुछ ही समय में भोलेनाथ ने राक्षस का वध  कर दिया।

राक्षस की मृत्यु के बाद उसके शरीर ने आस-पास के इलाके को ढक दिया जो पहाड़ जैसा लगने लगा। कुलंत हो हराने के बाद भगवान शिव इंद्र देवता के पास गए और उनसे कहा कि वो हर 12 साल में पहाड़ पर बिजली के झटके मारें। इससे स्थानीय लोगों को कोई नुक्सान ना हो, इसके लिए भगवान शिव ने खुद पर बिजली गिराने की बात कही। उसके बाद से ही हर 12 साल में शिवलिंग पर बिजली गिरती है। 

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Mahashivratri 2023 Bijli Mahadev Temple History and Unknown Facts in Hindi
कैसे पहुंचे मंदिर - फोटो : istock

कैसे पहुंचे मंदिर 

भगवान भोलेनाथ का ये मंदिर कुल्लू से लगभग 20 किमी दूर स्थित है। यहां तक आप 3 किमी का ट्रैक करते हुए पहुंच सकते हैं। ये ट्रैक पर्यटकों के लिए काफी मजेदार है। घाटियों और नदियों के कुछ मनोरम नजारों का आनंद लेने के लिए ये जगह बेस्ट है। जिसकी वजह से दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। 

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