ज्योतिर्लिंग (ज्योति + लिंग) का शाब्दिक अर्थ है "प्रकाश का प्रतीक लिंग"। यह भगवान शिव के उन पवित्र और दिव्य स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करता है, जो अग्नि-स्तंभ (ज्योति) के रूप में स्वयं प्रकट हुए थे। हिंदू धर्म में 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है, जो भारत के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर स्थित हैं।
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Mahashivratri 12 Jyotirling: 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का है प्लान? जानें यात्रा से जुड़ी सारी जानकारी
Wed, 26 Feb 2025 09:22 AM IST
दीक्षा पाठक
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Wed, 26 Feb 2025 09:22 AM IST
सार
12 Jyotirling: तो आज की इस खबर में हम आपको 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही इनका महत्व और यहां तक पहुंचने की सारी जानकारी भी दे रहे हैं। इस महाशिवरात्रि पर इन 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का प्लान कर सकते हैं।
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कैसे करें 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन?
- फोटो : अमर उजाला
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
- फोटो : instagram
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है। इसे "शिव का अनादि धाम" कहा जाता है और यह गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और इतिहास का अद्भुत संगम है।
क्या है महत्व
सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। यह मंदिर शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव (चंद्रमा) को अपने ससुर दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या करनी पड़ी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्त कर दिया और यहां "सोमनाथ" के रूप में स्वयं प्रकट हुए।
कैसे जाएं
रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा:
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है। इसे "शिव का अनादि धाम" कहा जाता है और यह गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में स्थित है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और इतिहास का अद्भुत संगम है।
क्या है महत्व
सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। यह मंदिर शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव (चंद्रमा) को अपने ससुर दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या करनी पड़ी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्त कर दिया और यहां "सोमनाथ" के रूप में स्वयं प्रकट हुए।
कैसे जाएं
रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
- सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन: वेरावल रेलवे स्टेशन (7 किमी)
- सोमनाथ एक्सप्रेस (मुंबई से)
- वेरावल एक्सप्रेस (अहमदाबाद से)
- जूनागढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस (राजकोट से)
- वेरावल रेलवे स्टेशन से मंदिर तक: स्टेशन से ऑटो, टैक्सी, या लोकल बस से 15-20 मिनट में मंदिर पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा:
- दीव एयरपोर्ट (DIU) – 85 किमी
- राजकोट एयरपोर्ट (RAJ) – 195 किमी
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
- फोटो : iStock
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भारत के द्वितीय ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है और इसे "दक्षिण का कैलाश" भी कहा जाता है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है और भगवान शिव तथा देवी पार्वती का दिव्य निवास माना जाता है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का महत्व
यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां भगवान शिव (मल्लिकार्जुन) और माता पार्वती (भ्रमराम्बा) दोनों की पूजा होती है। यह शक्ति पीठ भी है, जिससे इसकी आध्यात्मिक शक्ति और बढ़ जाती है।पौराणिक कथा के अनुसार, जब कार्तिकेय और गणेश में विवाह को लेकर विवाद हुआ, तो भगवान शिव और माता पार्वती कार्तिकेय को मनाने के लिए श्रीशैलम पर्वत आए। इसी कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
प्रमुख ट्रेनें:
हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा:
सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भारत के द्वितीय ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है और इसे "दक्षिण का कैलाश" भी कहा जाता है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है और भगवान शिव तथा देवी पार्वती का दिव्य निवास माना जाता है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का महत्व
यह एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां भगवान शिव (मल्लिकार्जुन) और माता पार्वती (भ्रमराम्बा) दोनों की पूजा होती है। यह शक्ति पीठ भी है, जिससे इसकी आध्यात्मिक शक्ति और बढ़ जाती है।पौराणिक कथा के अनुसार, जब कार्तिकेय और गणेश में विवाह को लेकर विवाद हुआ, तो भगवान शिव और माता पार्वती कार्तिकेय को मनाने के लिए श्रीशैलम पर्वत आए। इसी कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
- रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
- मार्कापुर रोड रेलवे स्टेशन (85 किमी)
- नांदयाल रेलवे स्टेशन (158 किमी)
- कर्नूल रेलवे स्टेशन (180 किमी)
प्रमुख ट्रेनें:
- हैदराबाद, चेन्नई, विजयवाड़ा और बेंगलुरु से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
- रेलवे स्टेशन से टैक्सी, बस या ऑटो द्वारा श्रीशैलम मंदिर पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा:
- राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, हैदराबाद (HYD) – 215 किमी
- विजयवाड़ा एयरपोर्ट (VGA) – 190 किमी
सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
- श्रीशैलम तक सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं:
- आंध्र प्रदेश राज्य परिवहन (APSRTC) की बसें – हैदराबाद, विजयवाड़ा, कर्नूल और अन्य शहरों से सीधी बस सेवा।
- प्राइवेट वोल्वो बसें भी उपलब्ध हैं।
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
- फोटो : instagram
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। यह मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है और कालों के काल (महाकाल) भगवान शिव को समर्पित है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयं प्रकट (स्वयंभू) ज्योतिर्लिंग है, जिसका उल्लेख कई ग्रंथों, विशेष रूप से शिवपुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। भगवान शिव यहां महाकाल (समय और मृत्यु के स्वामी) के रूप में पूजे जाते हैं, जो भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं और मोक्ष प्रदान करते हैं। महाकालेश्वर दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाता है। कहा जाता है कि इसका दर्शन मात्र से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
प्रमुख ट्रेनें:
हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक और सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। यह मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है और कालों के काल (महाकाल) भगवान शिव को समर्पित है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयं प्रकट (स्वयंभू) ज्योतिर्लिंग है, जिसका उल्लेख कई ग्रंथों, विशेष रूप से शिवपुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। भगवान शिव यहां महाकाल (समय और मृत्यु के स्वामी) के रूप में पूजे जाते हैं, जो भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं और मोक्ष प्रदान करते हैं। महाकालेश्वर दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाता है। कहा जाता है कि इसका दर्शन मात्र से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
- उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन (UJN) – मंदिर से सिर्फ 2-3 किमी दूर
प्रमुख ट्रेनें:
- दिल्ली, मुंबई, जयपुर, भोपाल, इंदौर और अन्य प्रमुख शहरों से उज्जैन के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
- रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या पैदल मंदिर पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
- देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर (IDR) – 55 किमी दूर
सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
- मध्य प्रदेश परिवहन निगम (MPRTC) की बसें – इंदौर, भोपाल, उज्जैन, कोटा और अन्य शहरों से सीधी बस सेवा।
- प्राइवेट वोल्वो बसें भी उपलब्ध हैं।
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भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग महादेव मंदिर का विहंगम दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच में स्थित ओंकार पर्वत पर स्थित है, जो "ॐ" के आकार में बना है और इसी कारण इसे "ओंकारेश्वर" कहा जाता है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच बने प्राकृतिक ॐ (ओंकार) आकार के द्वीप पर स्थित है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो भी भक्त यहां श्रद्धा से पूजा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि नर्मदा नदी शिवजी की पुत्री के रूप में पूजी जाती है और भगवान शिव इस स्थान पर हमेशा वास करते हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
प्रमुख ट्रेनें:
हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
ओंकारेश्वर तक सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं:
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच में स्थित ओंकार पर्वत पर स्थित है, जो "ॐ" के आकार में बना है और इसी कारण इसे "ओंकारेश्वर" कहा जाता है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच बने प्राकृतिक ॐ (ओंकार) आकार के द्वीप पर स्थित है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से विशिष्ट बनाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो भी भक्त यहां श्रद्धा से पूजा करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि नर्मदा नदी शिवजी की पुत्री के रूप में पूजी जाती है और भगवान शिव इस स्थान पर हमेशा वास करते हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं?
- रेल मार्ग (ट्रेन से यात्रा)
- ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन (OM) – 12 किमी दूर
- खंडवा रेलवे स्टेशन (KNW) – 66 किमी दूर
प्रमुख ट्रेनें:
- मुंबई, दिल्ली, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नागपुर, वाराणसी और अन्य प्रमुख शहरों से खंडवा और ओंकारेश्वर रोड रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं।
- रेलवे स्टेशन से टैक्सी, बस या ऑटो द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
हवाई मार्ग (फ्लाइट से यात्रा)
- देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, इंदौर (IDR) – 77 किमी दूर
सड़क मार्ग (बस / टैक्सी से यात्रा)
ओंकारेश्वर तक सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं:
- इंदौर, उज्जैन, भोपाल, खंडवा, बड़वाह से नियमित बस सेवाएं मिलती हैं।
- मध्य प्रदेश परिवहन निगम (MPRTC) और निजी वोल्वो बसें भी उपलब्ध हैं।