जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के स्थानीय निवासियों ने सरकार से यहां स्थित भगवान शिव महनाल स्थल और उसके आस-पास स्थित मंदिरों व गुरुद्वारे को राष्ट्रीय स्तर का पर्यटन हब बनाने की मांग की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन मंदिरों व भगवान शिव की गुफा का बेहद धार्मिक महत्व है लेकिन जिला प्रशासन और सरकार इनके प्रति उदासीन बनी हुई है। यहां अभी भी सड़क, स्ट्रीट लाइट आदि की सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई हैं, ऐसे में श्रद्धालुओं का काफी दिक्कत होती है।
जम्मू-कश्मीर: कठुआ में है प्राचीन शिव गुफा और 500 साल पुराना पेड़, गुरु नानक देव भी आए थे यहां
स्थानीय निवासियों ने इन धार्मिक स्थलों के प्रति जिला प्रशासन के उदासीन रवैये को लेकर चिंता जाहिर की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस जगह की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महाकाल शिव की ये गुफाएं अमरनाथ की गुफाओं से मिलती-जुलती हैं। लेकिन, जिला प्रशासन इनके विकास और नवीनीकरण को लेकर उदासीन बना हुआ है।
भगवान शिव की ये गुफाएं राजबाग से उत्तर की तरफ 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। ये गुफाएं कठुआ जिले के जाखोल गांव के नजदीक हैं। रोड-पुल कनेक्टिविटी है और न ही स्ट्रीट लाइट के न होने की वजह से यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कत होती है। इस स्थल के नवनिर्माण और विकास को लेकर स्थानीय लोगों ने सूबे के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से गुहार लगाई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि राज्यपाल ने जसरोटा से जाखोल के बीच सड़क निर्माण को अप्रूव किया है लेकिन अभी तक सड़क का काम शुरू नहीं हुआ है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस स्थल के विकास से जिले में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। हर साल महाशिवरात्रि के दिन संबा, कठुआ जिले के अलावा हिमाचल और पंजाब से भी यहां श्रद्धालु आते हैं। इस स्थल के धार्मिक महत्व को देखते हुए हर साल शिवरात्रि पर यहां करीब 70 हजार से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं।
ये गुफाएं उज्ह नदी से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर हैं। भगवान शिव की गुफा के नजदीक ही महाशक्ति मां, वैष्णी सहित नौ और मंदिर हैं। हर साल महाशिवरात्रि के दिन यहां पर धार्मिक उत्सव का आयोजन होता है और आस-पास के जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां आते हैं।
यहीं पर श्री चरन कमल साहिब पतश्यी जी का गुरुद्वारा है जो कि सिखों के धार्मिक स्थल के तौर पर प्रसिद्ध है। जसरोटा इलाके में ही महाकाली माता मंदिर भी है। इसके अलावा यहां स्थित गुरुद्वारे में भी बड़ी तादाद में सिख श्रद्धालु आते हैं। यहां पर गुरुपर्व के दिन काफी भीड़ होती है। बखता में स्थित गुरुद्वारा का भी ऐतिहासिक महत्व है। यहां पर गुरु नानक देव आए थे। यहां पर 500 साल पुराना पेड़ भी है।