Independence Day 2023 : भारत के इतिहास का सबसे गौरवपूर्ण दिन 15 अगस्त माना जाता है। इस दिन देश ब्रिटिश शासन की गुलामी से आजाद हुआ था। सदियों से अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों में जकड़े देश और देशवासियों ने काफी प्रताड़ना सही। अपने ही देश में गुलाम बनकर रहने, अधिकारों से वंचित रहने के कारण देशवासियों में आक्रोश उठा और उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की लौ जलाई।
Independence Day 2023: इन जगहों पर मनाएं भारत की आजादी का जश्न, याद आ जाएगा शहीदों का बलिदान
15 अगस्त के दिन आप दोस्तों, परिवार या बच्चों के साथ ऐसी जगहों पर घूमने जा सकते हैं, जो राष्ट्रप्रेम की भावना को बढ़ा देगा और आजादी के जश्न को दोगुना कर देंगी। ये रहीं देशभक्ति की भावना से सराबोर करने देने वाली जगह।
राष्ट्रीय शहीद स्मारक, दिल्ली
इस वर्ष 15 अगस्त मंगलवार को है। ऐसे में महज एक दिन की छुट्टी मिल रही है। अगर आप के पास अधिक समय नहीं और न ही ज्यादा पैसा खर्च करना चाहते हैं तो दिल्ली में ही ऐसी जगहों की सैर पर जा सकते हैं, जो आपको वीर सपूतों के बलिदान से रूबरू कराती हैं।
दिल्ली में लाल किले पर ध्वजारोहण और परेड देख सकते हैं। वहीं इंडिया गेट के पास बने नेशनल वाॅर मेमोरियल जा सकते हैं। यहां 1947, 1962, 1971 और 1999 में हुए युद्ध में शहीद वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
जलियांवाला बाग, अमृतसर
अमृतसर का जलियांवाला बाग इतिहास में हमेशा उस काले दिन के लिए याद किया जाता है, जब अंग्रेजों ने निहत्थे भारतीयों पर गोलियां बरसाई थीं। एक दर्दनाक हत्याकांड के अवशेष और मासूम भारतीयों के खून के दाग आज भी यहां की दीवारों पर दिखते हैं। यहां शहीद हुए सैकड़ों लोगों के नाम पर मेमोरियल बनाया गया है।
वाघा बॉर्डर, अमृतसर
आजादी से पहले भारत और पाकिस्तान एक ही था, बाद में इसे दो देशों में बांट दिया गया। दोनों देशों के बीच स्वतंत्रता दिवस के बाद से ही संघर्ष जारी है लेकिन अमृतसर में स्थित वाघा बॉर्डर पर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच का तालमेल दिखता है। यहां हर साल राष्ट्रीय दिवस का जश्न मनाया जाता है।
चंद्रशेखर आजाद पार्क, प्रयागराज
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रशेखर आजाद ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। 1931 में चंद्रशेखर आजाद प्रयागराज में ब्रिटिश सैनिकों से लड़ रहे थे। ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें घेर लिया लेकिन आजाद ने अंग्रेजों की गोली से मरने से बेहतर खुद की गोली समझी। महज 25 साल की उम्र में ही चंद्रशेखर आजाद शहीद हो गए। उनकी याद में इस जगह पर एक पार्क बना, जिसे चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है। पार्क में चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा लगी हुई है।