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Ganesh Chaturthi 2024: यहां विराजते हैं गणपति के 8 स्वरूप, तस्वीरों में करें अष्टविनायक के दर्शन

Sat, 07 Sep 2024 08:23 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sat, 07 Sep 2024 08:23 AM IST
सार

गणपति उत्सव के मौके पर महाराष्ट्र में स्थित इन अष्टविनायक मंदिरों के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो सबसे पहले ये जान लें कि अष्टविनायक मंदिरों के नाम क्या हैं और ये किन शहरों में स्थित हैं। साथ ही अगर आप अष्टविनायक मंदिरों नहीं जा सकते हैं जो तस्वीरों के जरिए दर्शन कर सकते हैं। 
 

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Ganesh Chaturthi 2024 8 Famous Ganpati Temples Yatra in Maharashtra Ashtavinayak darshan
महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala

 Ashtavinayak Darshan: 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत विनायक चतुर्थी से हो रही है। गणेशोत्सव के दौरान भव्य गणपति पंडाल सजते हैं और घरों में भी प्रथम पूज्य गणेश जी की स्थापना की जाती है। कई लोग इस मौके पर गजानन के मंदिरों के दर्शन के लिए जाते हैं। वैसे तो देशभर में गणपति के भव्य मंदिर बने हुए हैं लेकिन सबसे प्रमुख गणेश मंदिरों में अष्टविनायक का नाम शामिल है।



अष्टविनायक मंदिर एक मंदिर नहीं, बल्कि आठ गणेश मंदिरों की श्रृंखला है। इस श्रृंखला में शामिल हर गणपति मंदिर का अपना खास महत्व और इतिहास है। इन मंदिरों का जिक्र पुराणों में भी मिलता है। खास बात ये है कि आठों प्रमुख गणपति मंदिर महाराष्ट्र में ही स्थित हैं। ऐसे में अगर आपको अष्टविनायक मंदिरों के दर्शन करने हैं तो महाराष्ट्र के अलग अलग शहरों में जाकर दर्शन कर सकते हैं।

गणपति उत्सव के मौके पर महाराष्ट्र में स्थित इन अष्टविनायक मंदिरों के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो सबसे पहले ये जान लें कि अष्टविनायक मंदिरों के नाम क्या हैं और ये किन शहरों में स्थित हैं। साथ ही अगर आप अष्टविनायक मंदिरों नहीं जा सकते हैं जो तस्वीरों के जरिए दर्शन कर सकते हैं। 
 

Ganesh Chaturthi 2024 8 Famous Ganpati Temples Yatra in Maharashtra Ashtavinayak darshan
महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala

मोरगांव में मयूरेश्वर

महाराष्ट्र के पुणे जिले में बारामती तालुका में मोरगांव नाम का स्थान है, जहां मयूरेश्वर विनायक मंदिर है। अष्टविनायक मंदिरों में से एक मयूरेश्वर विनायक का आकार मोर के जैसा है, इस कारण इसे मोरगांव कहते हैं। त्रेता युग में सिंधु नाम के राक्षस सिंधुरासुर का वध करने के लिए भगवान गणेश ने मयूरेश्वर के रूप में 6 भुजाओं में श्वेत रंग धारण किया था और मोर को वाहन बनाया था। इस मंदिर का निर्माण काले पत्थर से हुआ है। दूर से देखने में मंदिर मस्जिद को चित्रित करता है, क्योंकि मुगल काल में मंदिरों को आक्रमणकारियों से बचाने के लिए यहां मीनारों का निर्माण कराया गया था।

Ganesh Chaturthi 2024 8 Famous Ganpati Temples Yatra in Maharashtra Ashtavinayak darshan
महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala

सिद्धटेक में सिद्धिविनायक

अहमदनगर जिले के काराट तालुका के सिद्धटेक में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर आठ अष्टविनायक यात्रा का हिस्सा हैं। मान्यता है कि मधु-कैटभ नाम के दो असुरों का वध जब भगवान विष्णु नहीं कर पा रहे थे, तो उन्होंने शिव जी से मदद मांगी। इस पर भगवान शिव ने उन्हें युद्ध से पहले गणेश जी का आह्वान करने को कहा। विष्णु जी ने इसी स्थान पर भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करके पूजा की। इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान सिद्धटेक मंदिर का निर्माण कराया। सिद्धिविनायक मंदिर एक पहाड़ी पर है, जिसका मुख उत्तर की ओर है। मंदिर के पश्चिम भाग में शंकर जी और देवी शिवी का छोटा सा मंदिर है।

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Ganesh Chaturthi 2024 8 Famous Ganpati Temples Yatra in Maharashtra Ashtavinayak darshan
महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala

पाली में बल्लालेश्वर अष्टविनायक मंदिर

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में अम्बा नदी के पास पाली गांव में स्थित बल्लालेश्वर विनायक मंदिर है। मान्यता है कि भगवान गणेश ने यहां ब्राह्मण वेश में बल्लाल को दर्शन दिया और हमेशा के लिए यहां वास करने का वरदान दिया। इसलिए इस मंदिर का नाम बल्लालेश्वर विनायक के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मंदिर का मूल निर्माण लकड़ी द्वारा किया गया था। मंदिर परिसर में यूरोपियन शैली की विशाल घंटी है, जो पुर्तगालियों के खिलाफ जीत के बाद स्थापित की गई थी। दक्षिणायन के समय सूर्य उदय होने पर सूर्य की किरणें भगवान गणेश पर पड़ती हैं।

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महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिर - फोटो : Amar Ujala

लेण्याद्री में गिरिजात्मज अष्टविनायक

गिरिजात्मक विनायक मंदिर का नाम भगवान गणेश की माता पार्वती (गिरिजा) के नाम पर पड़ा है जो कि पुणे जिले के जुन्नार तालुका में स्थित है। इस गणेश मंदिर के दर्शन के लिए भक्तों को 307 सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ी पर जाना होता है।यह वही स्थान है, जहां माता पार्वती ने गणेश जी की मूर्ति को आकार दिया और मिट्टी की मूर्ति जीवित हो गई। यहां गणपति जी की मूर्ति पहाड़ में स्वयं प्रकट हुई। दक्षिण की ओर मुख वाला यह गणपति मंदिर अठारह गुफाओं की श्रृंखला में आठवीं गुफा पर स्थित है। पुणे हवाई अड्डे से 97 किमी और मुंबई से 156 किमी दूरी पर है। गिरिजात्मज गणपति से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन 96 किमी दूर पुणे रेलवे स्टेशन है।

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