दार्जिलिंग पहाड़ पर स्थित है। यहां सड़कों का जाल बिछा हुआ है, जिसमें गुम हो जाने का मन करता है। पुराने और नए भवनों का मेल इसे एक खास सुंदरता प्रदान करता है। दर्जिलिंग से इश्क मुझे बचपन से है। यूं तो मैं घूमने-फिरने के लिहाज से कभी भी एक जगह नहीं जाता हूं, मगर बात करें मेरी पसंदीदा जगह की तो दार्जिलिंग मुझे बहुत पसंद है। मैं साल-दो साल में एक बार दार्जिलिंग जरूर जाता हूं।
पहली बार बचपन में दार्जिलिंग गया था, तबसे इस शहर से इश्क है। इसे पहाड़ों की रानी यूं ही नहीं कहा जाता है। ये बात तब समझ आई, जब वहां जाकर इसे करीब से जाना। वहां जाकर मन में अजीब-सी हलचल होती है। वह जगह मुझे इतनी भाई कि मैंने अपनी कई फिल्मों की शूटिंग वहीं की है। वहां की वादियों में शूट करने का मजा एकदम अलग है। मेरी फिल्म 'बर्फी' की शूटिंग भी वहीं हुई थी। पश्चिमी बंगाल मुझे वैसे भी बेहद अच्छा लगता है, इसलिए भी दार्जिलिंग मेरे पसंदीदा हिल स्टेशनों में एक है। अक्सर ऐसा होता है कि समय के साथ जगहों में बदलाव आता-जाता रहता है। मगर दार्जिलिंग आज भी बिल्कुल नहीं बदला है, वह शहर आज भी वैसा ही है, जैसा पचास साल पहले था। इसकी यही खासियत मुझे बार-बार अपनी ओर खींचती है। इस शहर में जो भी एक बार आता है,
मुझे लगता है कि वह बार-बार वहां जाने को तरसता होगा। इसकी खूबसूरती का आंकलन वहां जाए बिना अनुभव नहीं किया जा सकता। दार्जिलिंग के पर्वतीय क्षेत्र, टॉय ट्रेन, चाय के बागान, हरी-भरी वादियां जहां देखने योग्य हैं। वहीं टाइगर हिल भी देखने लायक है। टाइगर हिल पर चढ़ाई का लुत्फ उठाने बहुत लोग पहुंचते हैं। रोमांचकारी लोगों को टाइगर हिल बहुत पसंद आता है। वहां से खड़े होकर दार्जिलिंग की पहाड़ियों व वादियों का लुत्फ उठाना अपने आप में अनोखा अनुभव है। लोग वहां से सूर्य उदय नजारा देखने दूर-दूर से आते हैं।
टाइगर हिल के पास ही कंचनजंघा चोटी है। इसकी खूबसूरती में इतना प्रभाव है कि कई फिल्मों में भी इस चोटी को दिखाया जा चुका है। वहां की सड़कों पर घूमते हुए आपको औपनिवेशिक काल की बनी कई इमारतें दिख जाएंगी। ये इमारतें आज भी काफी आकर्षक प्रतीत होती है। मंदिरों व मठों के लिए दार्जिलिंग बेहद मशहूर है। वहां स्थित जापानी व नेपाली मंदिर और मठ पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। मंदिरों और मठों की खूबसूरती पर्यटकों को बहुत भाती है।
टॉय ट्रेन के जरिए भी दार्जिलिंग की खूबसूरती को निहारा जा सकता है। इस ट्रेन में सफर कर घूमते-फिरते दार्जिलिंग के पर्वतीय क्षेत्रों का आनंद लेना भी रोमांचकारी अनुभव प्रदान करता है। सड़क के साथ सटी संकरी-सी रेल ट्रेक पर चलती ट्रेन देखना भी अच्छा लगता है। वहां ट्रेनें मार्केट के बीचों-बीच दुकानों के बिल्कुल साथ से सटकर चलती हैं। दार्जिलिंग चाय के बागानों व वहां की चाय के लिए भी पूरे विश्व में मशहूर है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल तथा प्रसिद्ध स्थल है। वहां की चाय की खेती 1856 से शुरू हुई थी। वहां जाकर भी जिसने वहां की चाय नहीं पी, समझो उसका वहां आना ही बेकार है। वहां के लोग बेहद अच्छे हैं। वहां की वादियां तो वादियां, पहाड़ी वेशभूषा में सजे लोग भी सभी का ध्यान आकर्षित करते हैं।