घने पेड़ों से सजे जंगल, अनमोल वाइल्डलाइफ, विस्तार में पसरा नदी का आँचल और पहाड़ों का सुरक्षित घेरा, असम में यह सब कुछ मिलेगा। चाहे प्रकृति के सानिध्य में सुकून भरा समय बिताना चाहें या एक बड़ी सी नाव में ब्रह्मपुत्र की सैर करना या फिर गहरे-घने जंगल में अनूठे पशु-पक्षियों के सुमधुर संगीत के बीच आनंद लेना चाहें, यह सबकुछ असम की सैर में मिल सकता है। इसके साथ ही उत्तरपूर्वी संस्कृति और परम्पराओं की महक तो यहाँ मिलेगी ही। यहां आप फोटोग्राफी के उद्देश्य से भी आ सकते हैं और परिवार या दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के इरादे से भी। यहां हर उम्र के व्यक्ति के लिए कुछ न कुछ ख़ास है। माँ कामख्या का मंदिर तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। वहीं दूर दूर तक फैले टी एस्टेट की आंखों को सुकून देने वाली हरियाली भी एक विशेष अनुभव देती है। एडवेंचर और मनमोहक दृश्यों से भरपूर यह यात्रा आपके अनुभवों को और समृद्ध बनाने में मदद करेगी।
Assam tour: खूबसूरत वाइल्डलाइफ और पहाड़ों से सजा मनमोहक डेस्टिनेशन
एक सींग वाले गैंडे हैं आकर्षण
असम का कांजीरंगा नेशनल पार्क पूरे विश्व में इसकी जैव विविधता के लिए पहचाना जाता है। यहां विश्वप्रसिध्द एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं जिनको देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट यहां आते हैं। लेकिन यह केवल एक जगह ही नहीं है जो असम में वाइल्डलाइफ के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा मानस नेशनल पार्क भी विश्वस्तर पर ख्याति पाई हुई जगह है और इसे यूनेस्को ने नैचुरल वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में मान्यता दी है। यहां टाइगर रिज़र्व और एलिफेंट रिजर्व भी हैं।
वैभवशाली राजाओं का इतिहास
यदि आप इतिहास में रूचि रखते हैं और राजा-महाराजाओं के वैभव, समृद्धि व ताकत से भरपूर जीवन को जानने की इच्छा है तो असम में यह इच्छा भी पूरी होगी। सैकड़ों साल पहले आहोम राजाओं द्वारा यहां बनवाई गई इमारतें आज भी लगभग उसी मुस्तैदी से खड़ी हैं। दो मंजिला रोंग घर (रंग घर) यानी वह जगह जहाँ राजा बैठकर सामने चल रहे खेलों का आनंद लिया करते थे। ठीक जैसे आजकल वीआईपी लोग पैवेलियन में बैठकर मैच का लुत्फ़ उठाते हैं। इसे एशिया का सबसे पुराना एम्फीथियेटर भी कहा जाता है। इसे अलावा करेंग घर (राजा का महल), सिवाडोल में मौजूद खूबसूरत प्राचीन मंदिर आदि की सैर भी आपको उस बेजोड़ और भव्य आर्किटेक्चर से रूबरू करवाएगी जो आज से सैकड़ों साल पुराना है।
आस्था और भक्ति से भरपूर
असम में ही मौजूद है माँ कामख्या का मंदिर। गुवाहाटी से करीब 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित इस मंदिर का अद्भुत प्रभाव दर्शनार्थियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। अलौकिक योनि स्वरूप में यहां उपस्थित माता सती के दर्शनों की आस लेकर दूर-दूर से लोग आते हैं। यह देश के सबसे ख्यात शक्तिपीठों में से एक है और मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से हर मुराद पूरी होती है। लोग अपनी मुरादों के लिए यहाँ मन्नत की घंटियां बांधकर जाते हैं। सबसे खास बात यह कि इस मंदिर में महिलाओं को शक्ति रूप में ही मान्यता देते हुए उनका सम्मान किया जाता है।
चाय बागान और पहाड़ियां
असम की खूबसूरती यहाँ के पहाड़ों में भी बसती है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यहां मुस्तैदी से खड़े और हरियाली से भरे पहाड़ ख़ास दावत पेश करते हैं। इन्हीं के बीच बसे हैं कई छोटे छोटे खूबसूरत गाँव और लेक (भालुकपोंग और सेला लेक) यहाँ की खूबसूरती आपका मन मोह लेगी। यहाँ आपको परम्परिक असमिया लोककला और स्वाद का आनंद लेने का मौका भी मिल सकता है। वहीं दूर दूर तक फैले हैं टी एस्टेट, जहां चाय की पत्तियों की ताज़ी खुशबू आपको रोक लेगी और आप मन ही मन स्व. भूपेन हज़ारिका जी का गीत 'एक कली दो पत्तियां, नाजुक नाजुक उँगलियाँ,' गुनगुनाने को मजबूर हो जाएंगे। डिब्रूगढ़, सोनपुर और बारबाम आदि में इन टी एस्टेट की सैर करने का अवसर मिल सकता है।