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Shab-e-Barat 2023: आज है शब-ए-बारात, जानें इस दिन को मनाने का तरीका और महत्व

Tue, 07 Mar 2023 07:38 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Tue, 07 Mar 2023 07:38 PM IST
सार

कहते हैं, जो शब-ए-बारात में इबादत करता है, उनके सारे गुनाह माफ हो जाते हैं। इसलिए लोग शब-ए-बारात में रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।
 

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Shab E Barat 2023 Kab Hai Know When to Celebrate and Importance All Details
शब-ए-बारात मुबारक - फोटो : amar ujala

विस्तार

Shab-e-Barat 2023: आज यानी 7 मार्च को शब-ए-बारात है। यह मुस्लिम समुदाय के प्रमुख पर्वों में से एक है। शब-ए-बरात को इबादत की रात कहते हैं। इस पर्व पर रात में चांद को देखकर इबादत की जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, शब-ए-बारात शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात को मनाई जाती है। यह दीन-ए-इस्लाम का आठवां महीना होता है। इसे माह-ए-शाबान यानी बहुत मुबारक महीना माना जाता है। कहते हैं, जो शब-ए-बारात में इबादत करता है, उनके सारे गुनाह माफ हो जाते हैं। इसलिए लोग शब-ए-बारात में रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। आइए जानते हैं शब-ए-बारात को मनाने का तरीका और महत्व।

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शब-ए-बारात कैसे मनाते हैं?

अल्लाह की इबादत का यह दिन बहुत ही खास और पाक तरीके से मनाते हैं। शब-ए-बरात के मौके पर मस्जिद और कब्रिस्तानों को खास तरीके से सजाया जाता है। कब्रों पर चिराग जलाकर मगफिरत की दुआएं मांगी जाती है। लोग मस्जिद और कब्रिस्तान में जाकर अपने पूर्वजों के लिए खुदा से इबादत करते हैं। इसे चार मुकद्दस रातों में से एक मानते हैं, जिसमें पहली आशूरा की रात, दूसरी शब-ए-मेराज, तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए-कद्र की रात होती है।
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इसके अलावा शब-ए-बारात पर घरों को विशेष रूप से सजाते हैं। मस्जिद में नमाज पढ़कर अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगते हैं। घरों में लजीज पकवान जैसे, बिरयानी, कोरमा, हलवा आदि बनाया जाता है और इबादत के बाद गरीबों में बांटा जाता है।
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शब-ए-बारात का महत्व

शब का अर्थ है रात और बारात यानी बरी होना। इस आधार पर शब-ए-बारात गुनाहों की माफी मांगने और अल्लाह की इबादत कर अपने पापों को दूर करने की रात है। प्रतिवर्ष एक बाद शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शब-ए-बारात की रात शुरू होती है। इस रात दुनिया को छोड़कर जा चुके पूर्वजों की कब्रों पर उनके प्रियजन करते हैं और दुआ मांगी जाती है। सच्चे दिल से माफी मांगने और दुआ करने वाले लोगों के लिए अल्लाह जन्नत का दरवाजा खोलते हैं। 

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