Signs Of Emotional Abuse In Marriage: किसी भी हेल्दी रिश्ते की बुनियाद ही आपसी संवाद पर टिकी होती है। मगर अक्सर ऐसा होता है कि जब दोनों के बीच में कोई मनमुटाव होता है तो वे आपस में बात करना बंद कर देते है। इसे 'साइलेंट ट्रीटमेंट' कहा जाता है। ज्यादातर मामलों ऐसी स्थिति में एक साथी जानबूझकर दूसरे से बात करना बंद कर देता है, उसके सवालों का जवाब नहीं देता और उसे पूरी तरह नजरअंदाज करने लगता है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, साइलेंट ट्रीटमेंट अक्सर गुस्से को व्यक्त करने या दूसरे व्यक्ति को नियंत्रित करने के एक औजार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोगों को सुनने में यह सामान्य लग सकता है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे 'इमोशनल एब्यूज' का एक रूप मानते हैं।
जब कोई व्यक्ति अपने पार्टनर को बिना बताए बातचीत बंद कर देता है, तो सामने वाले के मन में असुरक्षा, भ्रम और गहरी मानसिक पीड़ा जन्म लेती है। लंबे समय तक चलने वाला यह बर्ताव रिश्ते में भरोसे को खत्म कर देता है और पार्टनर के बीच एक ऐसी दीवार खड़ी कर देता है जिसे गिराना बहुत मुश्किल लगने लगता है।
2 of 5
रिलेशनशिप
- फोटो : Adobe Stock
भावनात्मक रूप से कैसे चोट पहुंचाता है साइलेंट ट्रीटमेंट?
साइलेंट ट्रीटमेंट का सबसे बुरा असर पार्टनर के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। जब आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के नजरअंदाज किया जाता है, तो मस्तिष्क के वो हिस्सा सक्रिय होने लगता है जो शारीरिक दर्द के समय होता है। यह स्थिति व्यक्ति के आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाती है और उसे अकेलापन महसूस कराती है।
ये भी पढ़ें-
Green Flags: रिश्ते में दिखें ये 10 संकेत तो समझिए आपका पार्टनर सही है
3 of 5
रिलेशनशिप
- फोटो : Adobe Stock
रिश्ते के खोखलेपन की शुरुआत
किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत जरूरी है, लेकिन साइलेंट ट्रीटमेंट इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देता है। इससे पार्टनर के बीच 'इमोशनल कनेक्शन' कमजोर होने लगता है और वे एक ही घर में अजनबियों की तरह रहने लगते हैं। चुप्पी के कारण छोटे-छोटे मतभेद भी बड़े मानसिक तनाव का रूप ले लेते हैं। जब एक साथी अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता, तो रिश्ते में कड़वाहट और दूरी अपने आप बढ़ने लगती है।
ये भी पढ़ें-
Relationship Tips: रिश्ते में दिखें ये 7 संकेत तो संभल जाएं, वरना देर हो जाएगी
4 of 5
रिलेशनशिप
- फोटो : Adobe Stock
क्या यह पार्टनर को कंट्रोल करने का तरीका है?
विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों में साइलेंट ट्रीटमेंट का उपयोग 'मैनीपुलेशन' के लिए किया जाता है। इसमें चुप्पी साधने वाला व्यक्ति खुद को शक्तिशाली और दूसरे को लाचार महसूस कराने की कोशिश करता है। यह एक तरह की सजा देने जैसा है, जिससे सामने वाला व्यक्ति दबाव में आकर माफी मांगने या झुकने पर मजबूर हो जाए। यह व्यवहार रिश्ते में समानता को खत्म कर उसे टॉक्सिक बना देता है।
5 of 5
रिलेशनशिप
- फोटो : Freepik
क्या करें?
अगर आपका रिश्ता भी साइलेंट ट्रीटमेंट के दौर से गुजर रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। एक हेल्दी रिश्ते के लिए जरूरी है कि अपनी नाराजगी को शब्दों में व्यक्त किया जाए, न कि खामोशी में। अगर पार्टनर बात नहीं कर रहा है, तो उन्हें शांत मन से यह समझाएं कि उनकी चुप्पी आपको कितना दर्द दे रही है। ध्यान रखें बातचीत ही वह धागा है जो दो लोगों को जोड़कर रखता है। अगर बातचीत बंद हो गई, तो रिश्ता केवल एक औपचारिक बोझ बनकर रह जाएगा।