Contract Based Marriage Challenges: कॉन्ट्रैक्ट मैरिज आज के दौर में एक अनोखा और विवादास्पद कॉन्सेप्ट बन चुका है। कुछ लोगों के लिए यह समझदारी भरा फैसला होता है, तो कुछ के लिए यह सिर्फ एक सुविधा। लेकिन हर रिश्ते की नींव अगर भरोसे और ईमानदारी पर हो, तो वह ज्यादा मजबूत होता है। फिर चाहे वह कितने भी समय के लिए क्यों न हो। फिल्मों और सीरीज में होने वाली कॉन्ट्रैक्ट मैरिज अब असल जिंदगी में भी देखने को मिलती है। लेकिन इस तरह की शादी के फायदे और चुनौतियां क्या है। इस लेख के माध्यम से जानिए कि कॉन्ट्रैक्ट मैरिज क्या है, लोग क्यों इस तरह की शादी करते हैं और इस तरह की शादी से क्या क्या समस्याएं हो सकती हैं।
Contract Based Marriage: कॉन्ट्रैक्ट मैरिज क्या है और क्यों करते हैं कपल इस तरह की शादी, जानिए इसकी चुनौतियां
इस लेख के माध्यम से जानिए कि कॉन्ट्रैक्ट मैरिज क्या है, लोग क्यों इस तरह की शादी करते हैं और इस तरह की शादी से क्या क्या समस्याएं हो सकती हैं।
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कॉन्ट्रैक्ट मैरिज क्या है?
कॉन्ट्रैक्ट मैरिज एक ऐसा वैवाहिक समझौता होता है जिसमें शादी एक तय समय के लिए की जाती है। इसमें पति-पत्नी के बीच एक लिखित या मौखिक अनुबंध होता है, जो यह तय करता है कि वे कितने समय तक साथ रहेंगे, किन शर्तों पर रिश्ता चलेगा और तय समय के बाद क्या होगा यानी रिश्ता खत्म कर देंगे या आगे बढ़ाएंगे।
लोग कॉन्ट्रैक्ट मैरिज क्यों करते हैं?
ट्रायल रिलेशनशिप
कुछ लोग शादी से पहले एक-दूसरे को समझने और साथ रहने का अनुभव लेने के लिए यह तरीका अपनाते हैं।
लीगल या इमिग्रेशन जरूरतें
कई बार कॉन्ट्रैक्ट मैरिज इमिग्रेशन, नागरिकता या कानूनी फायदों के लिए भी होती है, हालांकि कई देशों में यह अवैध माना जाता है।
सामाजिक या पारिवारिक दबाव
कुछ कपल्स परिवार का दबाव झेलने से बचने के लिए इस तरह की शादी करते हैं, ताकि समाज को दिखा सकें कि वे शादीशुदा हैं।
फायदे आधारित साझेदारी
इसमें कपल व्यावसायिक पार्टनर्स की तरह होते हैं जो आपसी फायदे के लिए शादी करते हैं, जैसे आर्थिक समर्थन, मेडिकल बीमा आदि।
सबसे ज्यादा कहां होती है कॉन्ट्रैक्ट मैरिज?
भारत जैसे देश में शादी एक धार्मिक और सामाजिक संस्था है। यहां इसे जन्मों जन्मों का बंधन माना जाता है।इसलिए भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैरिज फिलहास चलन में नहीं है। हालांकि कई देशों में इसे अपनाया जाने लगा है। मिडिल ईस्ट देशों (जैसे ईरान, सऊदी अरब) में "मुताह निकाह" या "निका-ए-मुताह" जैसी अस्थायी शादी की परंपरा होती है, जो कॉन्ट्रैक्ट मैरिज से मिलती-जुलती है।
पश्चिमी देशों में ट्रायल मैरिज या लीगल कॉन्ट्रैक्ट के रूप में ये ट्रेंड देखा जाता है, खासकर अमेरिका और यूरोप में। जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों में भी कुछ खास परिस्थितियों में ऐसी शादियों का चलन बढ़ रहा है।
कॉन्ट्रैक्ट मैरिज की चुनौतियां
लोग आपसी फायदों के लिए इस तरह की शादी करते हैं लेकिन कॉन्ट्रैक्ट मैरिज की भी कई चुनौतियां हैं, जिसका सामना कपल को करना पड़ सकता है, जैसे
- इस तरह की शादी में भावनात्मक जुड़ाव की कमी होती है। चूंकि यह शादी सिर्फ एक डील होती है, तो उसमें सच्चा प्यार या भरोसा नहीं बन पाता।
- भारत जैसे पारंपरिक समाज में ऐसी शादियों को नकारात्मक नजर से देखा जाता है। कई देशों में इस तरह की शादी को समाज की स्वीकार्यता नहीं मिलती है।
- अगर इस रिश्ते से बच्चे होते हैं, तो तय समय बाद रिश्ता टूटने पर उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है।
- कई देशों में ऐसी शादी को मान्यता नहीं मिलती, जिससे कानूनी विवाद हो सकते हैं।