दुनिया में डायबिटीज की बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है। डायबिटीज के दोनों प्रकार चाहे टाइप 1 हो या टाइप 2 दोनों में ही इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। लगातार दर्द के कारण मरीजों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक नई टैबलेट की खोज की है जो मरीजों में एक नई किरण लेकर आई है।
डायबिटीज के मरीजों को नहीं होगा दर्द, अब इंसुलिन के इंजेक्शन के बजाय खा सकेंगे गोलियां
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मधुमेह के दोनों की प्रकार में अलग से इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ जाती है। क्योंकि टाइप 1 डायबिटीज में जहां इंसुलिन शरीर में बनना बंद हो जाता है वहीं टाइप 2 में शरीर को अलग से इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है। इसलिए डॉक्टर इंसुलिन थेरेपी की सलाह देते हैं। खासकर उन लोगों को जिनका कोई आपरेशन होने वाला हो या फिर गर्भवती मांओं को।
दोनों ही परिस्थितियों में इंसुलिन का इंजेक्शन मरीजों को लेना पड़ता है। मरीजों की इस तकलीफ से छुटकारा दिलाने के लिए वैज्ञानिक काफी समय से दवा के रूप में इसे बनाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन हर बार उन्हें असफलता हाथ लगी रही थी।
शुरुआत में तैयार किए गए इंसुलिन कैप्सूल आमतौर पर पेट मे एसिड के कारण टूटकर प्रभावहीन हो रहे थे और छोटी आंत तक उनकी पूरी डोज नहीं पहुंच पा रही थी। लेकिन एमआईटी टीम ने अब एक सुरक्षित और कोटेड टैबलेट बनाई है। मरीज द्वारा लिए जाने पर छोटी आंत में पहुंचने के बाद यह गोली ड्रग को रिलीज करना शुरू कर देगी और यह इंसुलिन ब्लड के साथ आराम से घुल पाएगा।
कैप्सूल के रूप में बनाई गई इंसुलिन की दवा छोटी आंत में पहुंच कर इंसुलिन को रिलीज करना शुरु कर देगी। शरीर में इंसुलिन पहुंचाने के लिए सबसे सही अंग छोटी आंत ही है। जहां से इस टैबलेट पर चढ़ी सुरक्षात्मक परत- पॉली(मेथैसेलेटिक एसिड-को-एथिल एक्रिलैट) से बनी होती है, जिसे 5.5 से अधिक पीएच में आसानी से घुलने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। यह रिसर्च मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है।