Gaslighting Spoils Relationships: रिश्ते प्यार, विश्वास और समझ की नींव पर टिके होते हैं, लेकिन जब इसमें गैसलाइटिंग जैसा व्यवहार शामिल हो जाता है, तो ये नींव हिलने लगती है। गैसलाइटिंग एक मनोवैज्ञानिक तरीका है, जिसमें एक व्यक्ति दूसरे को बार-बार यह एहसास दिलाता है कि उसकी भावनाएं, या सोच गलत हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति खुद पर शक करने लगता है और उसकी मानसिक सेहत पर गहरा असर पड़ता है। ऐसे में सेल्फ डाउट होना बहुत आम बात है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं कि गैसलाइटिंग रिलेशनशिप को कैसे प्रभावित करता है, और इसका एक उदाहरण क्या हो सकता है।
2 of 5
रिलेशनशिप
- फोटो : Freepik
गैसलाइटिंग क्या है?
गैसलाइटिंग तब होती है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर या अनजाने में अपने पार्टनर को ऐसा महसूस कराता है कि वो जो देख रहा है, सुन रहा है या सोच रहा है, वो सच नहीं है। उदाहरण के लिए, "तुम तो हर बात को बढ़ा-चढ़ाकर देखते हो" या "ऐसा कुछ हुआ ही नहीं, तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है" जैसे वाक्य गैसलाइटिंग का हिस्सा हो सकते हैं। ये धीरे-धीरे पीड़ित के आत्मविश्वास को खत्म कर देता है।
3 of 5
रिलेशनशिप
- फोटो : Freepik
इसको एक उदाहरण से समझें
मान लीजिए, नेहा और रोहन की शादी को पांच साल हो गए। शुरू में सब ठीक था, लेकिन पिछले कुछ समय से नेहा को लगने लगा कि रोहन उसकी हर बात को नकार देते हैं। एक दिन नेहा ने रोहन से कहा, 'तुमने कल मुझसे वादा किया था कि हम बाहर खाना खाने जाएंगे, लेकिन तुम ऑफिस से देर से आए और कुछ बोले भी नहीं।' रोहन ने जवाब दिया, 'मैंने ऐसा कोई वादा नहीं किया, तुम्हें गलतफहमी हुई होगी। तुम हमेशा ऐसी बातें बनाती हो।' नेहा को याद था कि बात हुई थी, लेकिन रोहन के बार-बार कहने पर उसे खुद पर शक होने लगा। धीरे-धीरे रोहन का ये व्यवहार बढ़ता गया। वो नेहा को छोटी-छोटी बातों पर गलत साबित करते, जैसे 'तुमने ये सामान गलत जगह रखा, पर तुम कहोगी कि मैंने ही रखा था।' नेहा का आत्मविश्वास डगमगाने लगा। वो उदास रहने लगी और रोहन से बहस करने से बचने लगी। नतीजा? उनका रिश्ता एकतरफा हो गया, जहां नेहा की आवाज दब गई।
4 of 5
रिलेशनशिप
- फोटो : Adobe Stock
गैसलाइटिंग का रिश्तों पर असर
- गैसलाइटिंग से रिश्ते में भरोसा कम होने लगता है। पीड़ित को लगता है कि वो अपने पार्टनर की बातों पर यकीन नहीं कर सकता, क्योंकि उसे हमेशा गलत साबित किया जाता है।
- बार-बार खुद को गलत समझने से चिंता, डिप्रेशन और तनाव बढ़ता है। पीड़ित अपनी भावनाओं को दबाने लगता है।
- गैसलाइटिंग करने वाला व्यक्ति पीड़ित को इस हद तक कन्फ्यूज कर देता है कि वो अपने फैसले खुद नहीं ले पाता और पार्टनर पर निर्भर हो जाता है।
- इसमें एक व्यक्ति हमेशा हावी रहता है, जबकि दूसरा कमजोर पड़ जाता है, जिससे रिश्ता असमान हो जाता है।
5 of 5
रिलेशनशिप
- फोटो : Adobe Stock
इससे बचने का तरीका
गैसलाइटिंग से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपनी भावनाओं पर भरोसा करें। अगर आपको लगता है कि आपका पार्टनर आपको बार-बार गलत साबित कर रहा है, तो दोस्तों या परिवार से बात करें। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लें। रिश्ते में खुलकर बात करना और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है।
नोट- लेख में बताई गई कहानी काल्पनिक है।