सुभाष चंद्र बोस की लव स्टोरी का ये सच नहीं जानते होंगे आप
आजादी की लड़ाई लड़ते लड़ते इस लड़की पर हार बैठे थे दिल
साल 1934 में जब ब्रिटिश सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भारत से निर्वासित किया तो वह यूरोप के वियेना चले गए। आंदोलन को छोड़कर विदेश में रहना उन्हें अखर रहा था। इसके बाद उन्होंने यूरोप में रह रहे भारतीय छात्रों को आजादी की लड़ाई के लिए एकजुट करने की योजना बनाई। इस दौरान उन्हें 'द इंडियन स्ट्रगल' नाम की किताब लिखने का मौका मिला। इसके लिए उन्हें एक सहयोगी की जरूरत थी जो अंग्रेजी टाइप करने में सक्षम हो। तभी उनके एक दोस्त ने मिस एमिली शांक्ले से मिलवाया। उस वक्त एमिली 23 साल की थी और सुभाष चंद्र बोस 37 साल के। अपनी इस 14 साल छोटी सहयोगी के साथ काम करते-करते कब उन्हें उससे प्यार हो गया, उन्हें खुद भी मालूम नहीं हुआ।
काम के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस और एमिली एक दूसरे के प्रति आकर्षत हुए और उनका प्यार परवान चढ़ा। दोनों यूरोप में साथ कई जगह घूमने भी गए। दो साल बाद, 1936 में नेताजी सुभाष चंद्र भारत लौट आए। काम की व्यस्तता के बावजूद वह वक्त निकालकर एमिली को खत लिखते रहे।
नेताजी की लिखी ये चिट्ठियां जब आजादी के सालों बाद प्रकाशित हुईं तो लोगों को उनके रोमांटिक पहलू से रूबरू होने का मौका मिला। इन्हें पढ़कर लगता है मानो चिट्ठियों में वह अपनी सारा प्यार उड़ेल देते थे-
अपने पत्र की शुरुआत में नेताजी ने लिखा- ‘मेरे हृदय की रानी’ (द क्वीन ऑफ माई हार्ट) ये तुम्हीं हो जिसकी वजह से मैं अपने देश से दूरी के दर्द को भूल पाया।'
“तुम पहली महिला हो, जिससे मैंने प्यार किया। भगवान से यही चाहूंगा कि तुम मेरे जीवन की आखिरी स्त्री भी रहो। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक महिला का प्यार मुझको बांध भी सकेगा। इससे पहले बहुतों ने मुझे प्यार करने की कोशिश की लेकिन मैने किसी की ओर नहीं देखा पर तुमने मुझे अपना बना ही लिया।”
1937 में जब सुभाष चंद्र एमिली को याद कर बेचैन हो उठे, तो वह उनसे मिलने ऑस्ट्रिया गये। शर्मिला बोस के लिखे 'लव इन द टाइम ऑफ वारः सुभाष चंद्र बोस जर्नी टू नाजी जर्मनी' के अनुसार, ऑस्ट्रिया के बडगस्टीन शहर में 26 दिसंबर को उन दोनों ने गुप्त शादी कर ली। दोनों ने इस शादी को गुप्त रखने का निर्णय लिया ताकि भारत के लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। सुभाष उस समय कांग्रेस के अगले अध्यक्ष बनने वाले थे। शादी के बाद दोनों ने कुछ दिन बडगस्टीन में साथ बिताए और जनवरी 1938 में नेताजी वापस भारत लौट आए। हालांकि, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इनकी शादी 1942 में हुई।
दोनों की शादी के बारे में सिर्फ इस शख्स को थी जानकारी
सुभाष चंद्र बोस और एमिली ने फैसला किया कि भारत की आजादी से पहले दोनों अपनी शादी का जिक्र किसी से नहीं करेंगे। हालांकि, इस शादी के बारे में सिर्फ नेता जी के मित्र पंडित जवारहरलाल नेहरू को मालूम था। नवंबर, 1942 में बोस और एमिली की बेटी अनिता का जन्म हुआ। बेटी के जन्म के कुछ समय बाद नेताजी 8 जनवरी 1943 को जर्मनी से जापान के लिए रवाना हो गए। एमिली और बेटी अनिता से यहा उनकी आखिरी मुलाकात थी। इसके बाद 1945 में प्लेन क्रैश में उनके निधन की खबर आई।