मोढ़ेनुमा पत्थर पर थकी-हारी सी बैठी उस महिला की उनींदी आंखों के नीचे काले घेरे थे और आंखें जैसे चेहरे के अंदर धंसी जा रही थीं।वो शायद कुछ चबा रही थीं, सवाल सुनकर एक कोने में थूककर बोलीं, "हां, पता है।वैलेंटाइंस डे है तो?" "क्या आपको किसी से प्यार है? आपकी जिंदगी में कोई है जो आपसे प्यार…?" अभी मेरे सवाल पूरे नहीं हुए थे कि वो बीच में ही बोल पड़ीं, "कोठेवाली से कौन प्यार करता है मैडम? कोई प्यार करेगा तो हम यहां बैठे रहेंगे क्या?" इतना कहकर उन्होंने मुझे बैठने का इशारा किया और मैं उनके बगल में जमीन पर ही बैठकर बातें करने लगी।सड़क के किनारे एक संकरी सी जगह में कई औरतें थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बैठी हुई थीं।गली और मेन रोड के बीच जो थोड़ी सी जगह बची थी वहां पैदल चलने वाले आ-जा रहे थे।मैं दिल्ली की जीबी रोड पर बसे उस इलाके में थी जहां औरतें सेक्स बेचकर दो वक़्त के खाने का जुगाड़ करती हैं।
यहां आने से पहले मुझे 'जरा संभलकर' और 'सतर्क' होकर बातचीत करने की सलाहें मिली थीं।मैं भी अपनी तरफ से पूरी सतर्कता बरत रही थी।मैं जानना चाहती थी कि जिन औरतों के पास लोग सिर्फ सेक्स के लिए आते हैं, उनकी जिंदगी में प्यार जैसा कोई एहसास है भी या नहीं। वैलेंटाइंस डे का जिक्र उनके आंखों में हल्की सी चमक लाता है या नहीं? यही सवाल मुझे इन गलियों तक खींच ले आए।मैंने सोचा था कि किसी ऐसी जगह पर जा रही हूं जहां रंग-बिरंगी झालरें और बत्तियां होंगी, जैसा कि हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता है लेकिन वहां ऐसा कुछ भी नहीं दिखा।
वो एक भीड़भाड़ वाला इलाका था जहां नजर दौड़ाने पर एक छोटा सा पुलिस थाना, हनुमान मंदिर और कुछ दुकानें दिखीं।पूछताछ करने पर एक शख़्स ने गली की तरफ इशारा किया जहां एक हट्टी-कट्टी औरत कमर पर हाथ रखे खड़ी थीं।मैं जितना ज़्यादा मुस्कुरा सकती था उतना मुस्कुराकर उनसे मिली और ऐसे बर्ताव किया जैसे उन्हें पहले से जानती हूं।थोड़ी बातचीत के बाद वो मुझे बाकी औरतों से मिलाने को राजी हो गईं।इस तरह मेरी मुलाकात उस दुबली-पतली औरत से हुई जिनका जिक्र मैंने ऊपर किया है।कर्नाटक की इस महिला का कहना था कि उन्होंने प्यार-व्यार की बातों को रद्दी के टोकरे में डाल दिया है।उन्होंने अपने चेहरे की ओर इशारा किया और बोलीं, "जब तक है बोटी, मिलती रहेगी रोटी। हमारे पास सब एकाध घंटे के लिए रुकते हैं, एंजॉय करने के लिए बस, किस्सा खत्म।"
कोलकाता की निशा पिछले 12 साल से इस पेशे में हैं।उन्होंने कहा, "वैसे तो मर्द बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन किसी की इतनी औकात नहीं है कि हमसे प्यार करने की हिम्मत करें।किसी में इतना दम नहीं कि हमें यहां से हटाकर अपने घर ले जाएं।"क्या 12 साल में उन्होंने यहां किसी को प्यार होते नहीं देखा? इसके जवाब में उन्होंने कहा, "देखा है ना! लोग आते हैं, प्यार में कसमें-वादे करते हैं।शादी करते हैं, बच्चे भी होते हैं और कुछ साल के बाद छोड़कर चले जाते हैं।"
'प्यार भी किया, शादी भी की...'
36 साल की रीमा की कहानी कुछ ऐसी ही है। वो कहती हैं, "आपने पूछा तो बता रही हूं।मुझे प्यार हुआ था।अपने ही एक कस्टमर से।हमने शादी कर ली और हमारे तीन बच्चे भी हुए।"रीमा को लगा था कि शादी के बाद उनकी जिंदगी सुधर जाएगी लेकिन वो बदतर हो गई।वो याद करती हैं, "वो दिर-रात शराब और ड्रग्स के नशे में धुत्त रहता था।मुझे मारता-पीटता था। ये सब तो मैंने बर्दाश्त किया लेकिन फिर उसने बच्चों पर हाथ उठाना शुरू कर दिया।"