आज संत रविदास जयंती है। 14वीं सदी के भक्ति युग में माघी पूर्णिमा के दिन रविवार को काशी के मंडुआडीह गांव में रघु व करमाबाई के पुत्र रूप में जन्मी इस विभूति ने भले ही चर्मकारी के पैतृक व्यवसाय को चुना हो, मगर अपनी रचनाओं से जिस समाज की नींव रखी, वह वाकई अद्भुत है। पेशे से चर्मकार रविदास जी अपने आजीविका को धन कमाने का साधन बनाने की बजाय संत सेवा का माध्यम बना लिया।
Ravidas Jayanti 2020: संत रविदास जी के अनमोल विचार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नवनीत राठौर
Updated Sun, 09 Feb 2020 01:01 PM IST
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