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World Food Day 2019: जानें कैसे हुआ भारतीयों के खाने की जान "रोटी" का जन्म

Wed, 16 Oct 2019 11:13 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Wed, 16 Oct 2019 11:13 AM IST
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World food day 2019: amazing stories of the birth of indian bread roti

हिंदुस्तान के किसी भी शहर की थाली बिना रोटी के पूरी नहीं होती है। चपाती, फुल्का या रोटी इसे कई सारे नामों से पुकारा जाता है। खाने की थाली चावल के साथ बिना रोटी के पूरी नहीं होती है। उत्तर-मध्य भारत की थाली का विशेष अंग ये रोटी खाने में जितनी आसान है बनाने में उतनी ही मुश्किल भी क्योंकि इसे बिल्कुल गोल बनाया जाता है साथ ही नर्म औैर मुलायम भी। लेकिन कभी आपने सोचा है कि इस रोटी का जन्म कैसे हुआ या सबसे पहले किसने रोटी बनाई होगी। तो आइए जानें ऐसे ही रोटी से जुड़े कुछ सवालों का जवाब।


 
World food day 2019: amazing stories of the birth of indian bread roti

वैसे तो खाने के लिए दूसरे देशों में ज्यादातर ब्रेड का प्रयोग किया जाता है लेकिन भारत में बनने वाली रोटी बहुत खास है क्योंकि इसे लगभग हर घर में महिलाएं रोज बनाती हैं। कहते है कि रोटी सबसे पहले पर्सिया से आई, जहां पर ये थोड़ी मोटी और मैदे की बनी होती थी। लेकिन आटे की बनी रोटी का जन्म पहले अवध में हुआ जहां पर गेंहू की पैदावार ज्यादा होती थी। गेंहू से बनने वाली इस रोटी का आटा थोड़ा मोटा और दरदरा होता था जो कि कुछ-कुछ आजकल बनने वाली रोटी जैसा होता था।

ऐसे ही बहुत सी कहानियां रोटी के इतिहास को लेकर प्रचलित है तो आइए जानने की कोशिश करें कि कैसे हुआ रोटी का जन्म।

 
World food day 2019: amazing stories of the birth of indian bread roti

ऐसे ही रोटी के बारे में एक प्रचलित कहानी है कि इसे पहले यात्रियों के खाने के लिए बनाया गया था जोकि कटोरी के आकार का होता था ताकि इसमें सब्जी को रखकर आसानी से खाया जा सके और किसी और बर्तन की जरूरत न पड़े।

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World food day 2019: amazing stories of the birth of indian bread roti

हमारे देश में रोटी पुराने समय से ही बन रही है इसका प्रमाण पुराने ग्रंथों से मिलता है जिसमें कहा गया है कि रोटी हणप्पा काल में भी लोग बनाना जानते थे क्योंकि ये काल बहुत तरह के अनाज ज्वार, बाजरा, गेहूं और सब्जी को उगाना जानता था। 

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World food day 2019: amazing stories of the birth of indian bread roti
- फोटो : pixa

साथ ही रामचरितमानस में तुलसीदास ने 1600 ईसापूर्व में कटोरी से मिलती-जुलती रोटी का वर्णन किया है। संस्कृत में भी रोटी को रोटिका नाम से चिकित्सा ग्रंथ में कहा गया है। 16 वीं सदी में लिखी गई इस किताब में रोटी को सब्जी से खाने वाले पदार्थ के रूप में बताया गया है।


 
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