गुलाम नबी आजाद को कौन नहीं जानता है। वह देश के एक जाने-माने नेता हैं और कांग्रेस पार्टी से संबंध रखते हैं। संसद में उन्होंने चार दशक से भी अधिक का लंबा वक्त बिताया है और 15 फरवरी को वह राज्यसभा से कार्यमुक्त हो जाएंगे। साल 1990 में वह पहली बार राज्यसभा के लिए चुने आए थे। इसके अलावा भी वह कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह सिर्फ इंदिरा गांधी ही नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के भी खास रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि बीते मंगलवार को जब उनकी आधिकारिक विदाई हो रही थी, तब प्रधानमंत्री मोदी भी भावुक हो गए थे। आइए जानते हैं 71 वर्षीय गुलाम नबी आजाद के बारे में कुछ खास बातें...
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गुलाम नबी आजाद (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
सात मार्च, 1949 को जम्मू के डोडा में जन्मे गुलाम नबी आजाद काफी पढ़े-लिखे नेता हैं। उन्होंने श्रीनगर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय से जंतुविज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है। माना जा रहा है कि राजनीति से सेवामुक्त होने के बाद वह अपने गृहनगर डोडा में ही ज्यादातर वक्त बिताएंगे।
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गुलाम नबी आजाद
- फोटो : Twitter/Ghulam Nabi Azad
साल 1973 में गुलाम नबी आजाद ने ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वह इतने दमदार नेता के तौर पर उभरे कि कुछ ही समय में उन्होंने अपनी पहचान बना ली। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जब जम्मू की यात्रा पर गईं थीं, तो वह आजाद से काफी प्रभावित हुईं थीं। इसका असर ये हुआ कि साल 1975 में वह जम्मू-कश्मीर यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बना दिए गए और फिर 1980 में वह यूथ कांग्रेस के अखिल भारतीय अध्यक्ष बन गए।
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गुलाम नबी आजाद
- फोटो : Twitter/Ghulam Nabi Azad
साल 1980 में ही गुलाम नबी आजाद महाराष्ट्र के वाशिम से लोकसभा का चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने। इसके बाद तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ते रहे। साल 1982 में उन्हें केंद्रीय मंत्री का अहम पद दिया गया। वह सरकार में कई अहम पदों पर रह चुके हैं।
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गुलाम नबी आजाद के साथ राजीव गांधी
- फोटो : Twitter/Ghulam Nabi Azad
गुलाम नबी आजाद के मुख्यमंत्री बनने की कहानी बड़ी ही रोचक और लंबी है। कहते हैं कि साल 1986 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनसे जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री बनने का आग्रह किया था, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था कि उन्हें राज्य की राजनीति की कोई इच्छा नहीं है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर पहले राज्य हुआ करता था, जिसे अब दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया है। साल 1995-96 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने भी गुलाम नबी से जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने का आग्रह किया था, लेकिन वह उस समय भी नहीं माने थे, लेकिन आखिरकार वह साल 2005 में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बन ही गए।