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श्राद्ध 2026: पितृपक्ष कब से शुरू हो रहे हैं? जानिए इसके पीछे की परंपरा क्या कहती है

Sun, 20 Sep 2026 05:05 PM IST
Shruti Gaur लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shruti Gaur Updated Sun, 20 Sep 2026 05:05 PM IST
सार

Pitru Paksha kab se hai: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का काफी महत्व है। ऐसे में पहले से जान लीजिए कि इसका आरंभ कब होगा और कब समापन होगा। 

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पितृपक्ष कब से शुरू हो रहे हैं? - फोटो : AI
Pitru Paksha kab se hai:  पितृपक्ष हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की महत्वपूर्ण अवधि मानी जाती है। इस दौरान परिवार के लोग अपने दिवंगत पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। इस दौरान लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध कर्म करते हैं और पितरों के निमित्त भोजन, जल आदि अर्पित करते हैं। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इन परंपराओं को निभाने की विधि में कुछ अंतर भी हो सकता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहा है और इसका समापन कब होगा। 


 
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पितृपक्ष कब से शुरू हो रहे हैं? - फोटो : AI
पितृपक्ष 2026 कब से शुरू होगा?

 पंचांग के अनुसार पितृपक्ष 26 सितंबर 2026, शनिवार से शुरू होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध है, जबकि 27 सितंबर से कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के साथ पितृपक्ष का मुख्य क्रम शुरू होता है। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। यह अमावस्या उन पितरों के लिए श्राद्ध करने की तिथि मानी जाती है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो या जिनका श्राद्ध किसी विशेष तिथि पर न किया जा सके।   

 
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पितृपक्ष कब से शुरू हो रहे हैं? - फोटो : AI

  पितृपक्ष में क्या किया जाता है?

 पितृपक्ष के दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों की स्मृति में श्राद्ध कर्म करता है। धार्मिक परंपरा में तर्पण, पिंडदान और पितरों के निमित्त भोजन अर्पित करने जैसी विधियों का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि इन कर्मों के माध्यम से व्यक्ति अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करता है। कई परिवार इस अवधि में ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने और दान देने की परंपरा भी निभाते हैं। हालांकि, इन कर्मकांडों की विधि और मान्यताएं परिवार, क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

 
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पितृपक्ष कब से शुरू हो रहे हैं? - फोटो : AI
इसके पीछे की परंपरा क्या कहती है?

हिंदू परंपरा में मनुष्य के जीवन को केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि पूर्वजों से प्राप्त जीवन, संस्कार और पारिवारिक परंपरा से जोड़ा गया है। इसलिए पितृपक्ष को अपने दिवंगत पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनके नाम से धार्मिक कर्म करने की अवधि माना जाता है।

परंपरा में मुख्य रूप से ये बातें कही जाती हैं:

  • श्राद्ध — 'श्रद्धा' से जुड़ा कर्म माना जाता है। इसका भाव पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

  • तर्पण — जल आदि अर्पित करके पितरों का स्मरण किया जाता है।

  • पिंडदान — चावल आदि से बनाए गए पिंड अर्पित करने की परंपरा है। इसके धार्मिक अर्थ अलग-अलग परंपराओं में कुछ भिन्न रूप में समझाए जाते हैं।

  • दान और भोजन — ब्राह्मणों, अतिथियों या जरूरतमंदों को भोजन कराने और दान देने की परंपरा भी कई परिवारों में है।

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