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जानना जरूरी: क्या आपके पेशाब में भी दिख रहा है झाग? कहीं ये किडनी की बीमारी का संकेत तो नहीं

Sun, 20 Sep 2026 06:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 20 Sep 2026 06:18 PM IST
सार

पेशाब में कभी-कभार झाग आना सामान्य हो सकता है, लेकिन लगातार झाग आना पेशाब में प्रोटीन लीक होने का संकेत हो सकता है। इसे एल्ब्यूमिनयूरिया कहा जाता है और यह किडनी की समस्याओं का संकेत हो सकता है। 

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Foamy Urine When Should You Be Concerned Protein in Urine and its risk
पेशाब में झाग की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

आप कितने स्वस्थ हैं, शरीर के भीतर सबकुछ ठीक चल रहा है या नहीं? इसका अंदाजा रोजाना दिखने वाले संकेतों की मदद से आसानी से लगाया जा सकता है। असल में हमारा शरीर खुद इस बारे में इशारा करता रहता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को त्वचा, नाखून, जीभ में दिखने वाले बदलावों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।



इसके अलावा पेशाब पर भी ध्यान देकर आप शरीर के अंदर के हाल-चाल, विशेषरूप से किडनी की सेहत के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं। क्या आपको पेशाब में कुछ दिनों से कुछ अजीब सा बदलाव दिख रहा है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  पेशाब करते समय कभी-कभी झाग या बुलबुले दिखाई देना आम बात है। लेकिन अगर यही झाग बार-बार दिखाई दे, ज्यादा देर तक बना रहे या इसके साथ शरीर में सूजन जैसी दूसरी परेशानियां भी हों, तो इसे सिर्फ सामान्य बदलाव मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।

डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो पेशाब में झाग दिखने के कई कारण हो सकते हैं, पर अगर आपको रोज पेशाब में झाग दिख रहा है तो सावधान हो जाना चाहिए।

Foamy Urine When Should You Be Concerned Protein in Urine and its risk
किडनी की बीमारी - फोटो : Adobe Stock

पेशाब की समस्याओं का किडनी से संबंध

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, किडनी हमारे खून को छानकर शरीर से बेकार पदार्थ और अतिरिक्त पानी को पेशाब के रास्ते बाहर निकालती है। स्वस्थ किडनी खून में मौजूद प्रोटीन को पेशाब में जाने से रोकती है।
 

  • लेकिन किडनी के फिल्टर करने की क्षमता में कोई गड़बड़ी होने पर प्रोटीन पेशाब में आने लग सकता है।
  • इसे प्रोटीनयूरिया या एल्ब्यूमिनयूरिया कहा जाता है।
  • पेशाब में ज्यादा प्रोटीन आने से पेशाब झागदार दिखाई दे सकता है।


हालांकि झागदार पेशाब को देखकर तुरंत इसे किडनी की बीमारी मान लेने सही नहीं है। आइए जान लेते हैं कि कब आपको सावधान हो जाना चाहिए?

Foamy Urine When Should You Be Concerned Protein in Urine and its risk
पेशाब में झाग की समस्या - फोटो : Freepik.com

हर बार झाग दिखे तो न हों परेशान

यूरोलॉजिस्ट डॉ पंकज कुमार बताते हैं, पेशाब में कभी-कभार बुलबुले या हल्का झाग दिखना कोई गंभीर समस्या या किडनी की बीमारी नहीं है। 
 

  • पेशाब की तेज धार से गिरने, पानी की कमी या टॉयलेट में मौजूद कुछ पदार्थों की वजह से भी ऐसा दिखाई दे सकता है। इसलिए सिर्फ एक-दो बार झाग देखकर घबराने की जरूरत नहीं है।
  • लेकिन अगर पेशाब में बार-बार और लगातार झाग दिखाई देता है और ये लंबे समय तक बना रहता है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।


कब हो जाएं अलर्ट?

डॉक्टर कहते हैं, किडनी के फिल्टर की क्षमता में गड़बड़ी में पेशाब में प्रोटीन आने लगता है। इसे एल्ब्यूमिनयूरिया कहते हैं और कई बार ये किडनी के डैमेज होने का संकेत भी हो सकता है। इसके साथ अगर आपको पैरों-टखनों, हाथों या आंखों के आसपास सूजन या ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसी समस्या हो तो इसे टालना नहीं चाहिए। 

किडनी की बीमारी कई बार शुरुआती दौर में बहुत कम या कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देती। इसलिए केवल लक्षण आने का इंतजार करना समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है। जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या परिवार में किडनी फेलियर की हिस्ट्री है, उन्हें इन समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

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Foamy Urine When Should You Be Concerned Protein in Urine and its risk
खून से जांच से किडनी की बीमारी का लगेगा पता - फोटो : Adobe Stock

किडनी में गड़बड़ी का पता कैसे लगाएं?

अगर आपको भी झागदार पेशाब की समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से इसकी सलाह लें। आपकी स्थिति और हिस्ट्री को देखते हुए डॉक्टर यूएसीआर टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

यूएसीआर यानी यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो टेस्ट पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा को क्रिएटिनिन के मुकाबले मापता है। सामान्य तौर पर यूएसीआर 30 मिलीग्राम प्रति ग्राम या उससे कम  होना सामान्य माना जाता है, जबकि 30 मिलीग्राम प्रति ग्राम से ज्यादा किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है। इसके अलावा खून में क्रिएटिनिन की जांच और ईजीएफआर किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का पता चल सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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