किडनी भले ही हमारे शरीर का छोटा सा अंग है, पर इसकी हमारी सेहत में बड़ी भूमिका मानी जाती है। किडनी खून को साफ करने और शरीर के आंतरिक संतुलन को बनाए रखने का काम करते हैं। किडनी रोज हमारे शरीर का सारा खून छानती है और उसमें मौजूद यूरिया, क्रिएटिनिन, टॉक्सिन्स और अतिरिक्त पानी को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। इतना ही नहीं, रेनिन जैसे हार्मोन और एंजाइम बनाकर किडनी ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी मदद करती है। ऐसे में किडनी में होने वाली किसी भी समस्या का असर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है।
सेहत की बात: आपकी किडनी ठीक से काम कर रही है या नहीं? इन टेस्ट से लगा सकते हैं पता
किडनी की सेहत जानने के लिए सिर्फ क्रिएटिनिन देखना पर्याप्त नहीं है। ईजीएफआर किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का अनुमान देता है, जबकि यूएसीआर पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी प्रोटीन की मौजूदगी बताता है। क्रिएटिनिन, ईजीएफआर और यूरिन एल्ब्यूमिन को साथ देखकर किडनी की स्थिति का बेहतर आकलन किया जाता है।
किडनी की सेहत का रखें ख्याल
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी की जांच की बात आते ही सबसे पहले क्रिएटिनिन का नाम सामने आता है। क्रिएटिनिन खून में बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है, जिसे किडनी फिल्टर करके बाहर निकालती है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर इसका स्तर बढ़ सकता है। लेकिन सिर्फ क्रिएटिनिन का स्तर देखकर किडनी की पूरी स्थिति को नहीं समझा जा सकता।
किडनी की सेहत जानने के लिए डॉक्टर आमतौर पर यह भी देखते हैं कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है और क्या किडनी के फिल्टर से प्रोटीन पेशाब में तो नहीं जा रहा?
यही वजह है कि डॉक्टर जरूरतों के आधार पर ईजीएफआर और यूएसीआर जैसे टेस्ट कराने की भी सलाह दे सकते हैं।
क्रिएटिनिन बढ़ा तो नहीं रहता?
क्रिएटिनिन शरीर की मांसपेशियों के सामान्य कामकाज से बनने वाला अपशिष्ट पदार्थ है। किडनी इसे खून से निकालकर पेशाब के रास्ते बाहर करती है।
- हालांकि जब किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम हो जाती है तो खून में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ने लग सकता है।
- क्रिएटिनिन बढ़ने पर क्रॉनिक किडनी डिजीज औ किडनी फेलियर को खतरा हो सकता है, लेकिन सिर्फ क्रिएटिनिन लेवल देखकर किडनी की पूरी हालत का अंदाजा नहीं लगया जा सकता।
शरीर में मांसपेशियों की मात्रा जैसे कारक भी क्रिएटिनिन को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से डॉक्टर क्रिएटिनिन के आधार पर ईजीएफआर यानी एस्टिमेटेड ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन टेस्ट की भी सलाह दे सकते हैं।
पेशाब की जांच
किडनी का काम सिर्फ बेकार पदार्थ बाहर निकालना नहीं है। किडनी खून में मौजूद जरूरी प्रोटीन को भी शरीर में बनाए रखती है। जब किडनी के फिल्टर को नुकसान होता है, तो एल्ब्यूमिन नाम का प्रोटीन पेशाब में आने लग सकता है। इसे एल्ब्यूमिनयूरिया कहा जाता है।
- इसीलिए किडनी की जांच में यूएसीआर यानी यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो भी महत्वपूर्ण है।
- पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा को क्रिएटिनिन के मुकाबले मापता है। सामान्य तौर पर 30 मिलीग्राम प्रति ग्राम या उससे कम परिणाम सामान्य माना जाता है। इससे ऊपर का स्तर किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है।
- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की बीमारी के जोखिम वाले लोगों में डॉक्टर इस जांच की नियमित सलाह दे सकते हैं।
किडनी के अन्य जांच
किडनी की जांच के लिए डॉक्टर यूरिन टेस्ट, यूएसीआर, सीरम क्रिएटिनिन और ईजीएफआर के साथ ब्लड यूरिया नाइट्रोजन, इलेक्ट्रोलाइट्स, ग्लूकोज और अन्य जांच भी करा सकते हैं। कौन-सा टेस्ट जरूरी है, यह व्यक्ति की उम्र, लक्षण और दूसरी बीमारियों पर निर्भर करता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है, ऐसे लोगों को अपनी किडनी की सेहत पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।