सरसों का तेल, कनोला ऑयल, नारियल का तेल, एवेकाडो ऑयल, मूंगफली का तेल, ऑलिव ऑयल, अलसी का तेल, पामोलीन ऑयल… लिस्ट बहुत लंबी है। खाना-पकाने के लिए तेल के बहुत सारे विकल्प हैं। मगर, कौन सा तेल सेहत के लिए सबसे अच्छा है? खाने और सेहत को लेकर फिक्रमंद लोग अक्सर इस सवाल से दो चार होते हैं। खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल अक्सर उसके फल, पौधे, बीज या नट से तय होते हैं। इन्हें कुचलकर, दबाकर या प्रॉसेस करके निकाला जाता है। पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड तेल की सबसे बड़ी ख़ूबी ये होती है कि उसमें फैट की ज्यादा मात्रा होती है। इसमें सैचुरेटेड फैट, मोनोसैचुरेटेड फैट और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड शामिल होते हैं।
World Heart Day: वह तेल जिसमें खाना पकाना सेहत के लिए सबसे फायदेमंद, दिल का भी रखे खास ख्याल
कुछ वर्षों पहले तक नारियल के तेल को सेहत के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता था। कई लोगों ने तो इसे सुपरफूड घोषित कर दिया था। कुछ लोगों का दावा था कि इस तेल के वसा के रूप में शरीर मे जमा होने की संभावना बेहद कम थी। लेकिन, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च ने नारियल तेल को 'विशुद्ध जहर' करार दे दिया। इसकी वजह ये है कि इंसान का शरीर बहुत फैट नहीं पचा सकता और अधिक फैट हमारे शरीर में जमा होने लगता है, जो दिल की बीमारियां और ब्लड प्रेशर जैसी सेहत की समस्याएं पैदा करता है।
ब्रिटेन में सरकार की गाइडलाइन कहती है कि किसी पुरुष को दिन भर में तीस ग्राम और महिला को बीस ग्राम से अधिक तेल नहीं खाना चाहिए। इसकी वजह भी समझिए। तेल में जो फैट होता है, वो फैटी एसिड के कणों से मिलकर बनता है। ये फैटी एसिड या तो सिंगल बॉन्ड से जुड़े होते हैं, जिन्हें सैचुरेटेड फैट कहते हैं।
खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा
या फिर डबल बॉन्ड से जुड़े होते हैं, जिन्हें अनसैचुरेटेड फैट कहते हैं। जो फैटी एसिड छोटी श्रृंखला में बंधे होते हैं, वो खून में सीधे घुल जाते हैं। और शरीर की एनर्जी की जरूरत पूरी करते हैं। लेकिन, लंबी चेन वाले फैटी एसिड सीधे लिवर में जाते हैं। इससे हमारे ख़ून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है।
नारियल के तेल को लेकर हुई रिसर्च कहती है कि इससे हमारे शरीर में लो डेन्सिटी लिपोप्रोटीन (LDL) की मात्रा बढ़ जाती है। LDL का सीधा संबंध दिल के दौरे से पाया गया है। हालांकि नारियल के तेल से हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन (HDL) भी मिलती है, जो ख़ून से LDL को खींच लेती है।
फैटी एसिड और विटामिन
वर्जिनिया की जॉर्ज मैसन यूनिवर्सिटी के प्रो. टेलर वॉलेस कहते हैं कि, 'HDL में लॉरिक एसिड नाम का केमिकल होता है, जिसे C12 फैटी एसिड कहा जाता है। ये लॉन्ग चेन वाला फैटी एसिड होता है, जो लिवर में जमा हो जाता है। इससे स्वास्थ्य की दिक़्क़तें पैदा होती हैं।'
इसीलिए, जानकार कहते हैं कि जिस तेल में सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम हो उसे खाना बेहतर होता है। और इसे भी कम मात्रा में ही खाना चाहिए। पॉलीअनसैचुरेटेड फैट और ओमेगा-3,6 फैट वाले तेल खाना बेहतर होता है। इससे ख़ून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है। और शरीर को जरूरी फैटी एसिड और विटामिन मिल जाते हैं।
दिल की बीमारियों की आशंका
पॉलीअनसैचुरेटेड और मोनोसैचुरेटेड फैट वाले फैटी एसिड कई तेलों में पाए जाते हैं। इनकी मात्रा पौधे और तेल निकालने की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। एक सर्वे में पाया गया है कि ऑलिव ऑयल का ज़्यादा इस्तेमाल दिल की बीमारियों की आशंका को पाँच से सात प्रतिशत तक कम कर देता है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के टीएच चैन स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ की वैज्ञानिक मार्टा गॉश फेरे ने 24 साल तक एक लाख लोगों पर एक स्टडी की। उन्होंने पाया कि जो हर तरह के ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, उनमें दिल की बीमारियों की आशंका 15 फीसदी तक कम हो जाती है।