दुनियाभर में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर आशंका बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुतबिक तीसरी लहर से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए वैक्सीनेशन अभियान को और तेज करने की आवश्यकता है। इन सब के बीच लोगों के मन में वैक्सीन की खुराक को लेकर तरह-तरह के सवाल हैं। इसी से संबंधित हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि सभी लोगों को लिए कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेना बेहद जरूरी है, संक्रमण से सुरक्षित रखने में दूसरी डोज से बनी मजबूत एंटीबॉडीज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कोराना वैक्सीन लेते समय इस बात का जरूर रखें ध्यान, वरना टीके से नहीं मिलेगा फायदा
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एंटीबॉडीज को बढ़ाने के लिए आवश्यक है दूसरी डोज
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने कोविड वैक्सीन ले चुके 56 लोगों के ब्लड सैंपल का परीक्षण किया। इस सैंपल के आधार पर शरीर में बनीं एंटीबॉडीज की मात्रा, प्रतिरक्षा-संकेतक प्रोटीन के स्तर और जीनोम का परीक्षण किया। अध्ययन में शामिल ज्यादातर लोगों ने फाइजर (आरएनए) वैक्सीन लगवाई थी। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीन की पहली डोज शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज के स्तर को तो बढ़ा देती है। हालांकि वैक्सीन की दूसरी डोज इन पहले से बनी एंटीबॉडीज को शक्तिशाली बनाने के साथ इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए काफी आवश्यक है।
दूसरी डोज के बाद बढ़ जाती हैं टी-कोशिकाएं
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद एंटीबॉडीज के उन अंशों का भी विकास हो जाता है जो सामान्यतौर पर पहली खुराक के बाद नहीं बन पाती हैं। इस बारे में स्टैनफोर्ड मेडिसिन के प्रोफेसर बाली पुलेंद्रन कहते हैं, वैक्सीन की पहली डोज की तुलना में दूसरे शॉट के बाद एंटीबॉडीज के स्तर में कई गुना तक वृद्धि देखने को मिली है। अध्ययन के दौरान पाया गया कि पहली डोज के बाद एंटीबॉडीज का टी-कोशिकाएं कम थी, हालांकि दूसरी खुराक के बाद इनमें तेजी से इजाफा देखने को मिला है। टी-कोशिकाओं को किलर कोशिकाओं के रूप में भी जाना जाता है जो शरीर में संक्रमित कोशिकाओं को ढूंढकर उन्हें नष्ट कर देती हैं, इससे संक्रमण पूरे शरीर में नहीं फैलने पाता है।
फर्स्ट रिस्पॉन्डर कोशिकाओं का स्तर भी बढ़ा देती है दूसरी डोज
प्रोफेसर बाली पुलेंद्रन कहते हैं, वैक्सीन की दूसरी खुराक फर्स्ट रिस्पॉन्डर कोशिकाओं को भी बढ़ावा देने में काफी सहायक पाई गई हैं। वैक्सीन की पहली डोज के बाद जहां इन कोशिकाओं की मात्रा केवल 0.01 प्रतिशत थी, उसी में दूसरी डोज के बाद करीब 100 गुना तक बढ़ोतरी देखी गई है। यह कोशिकाएं वायरल संक्रमणों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करने में विशिष्ट रूप से सक्षम होती हैं। इस आधार पर भी हम कर सकते हैं कि सभी लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज हर हाल में लेनी चाहिए।
क्या हैं अध्ययन के निष्कर्ष
अध्ययन के निष्कर्ष में पुलेंद्रन और उनकी टीम का कहना है कि कोरोना के जिस तरह के म्यूटेटेड और अपेक्षाकृत अधिक घातक वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, ऐसे में इनसे बचाव के लिए शरीर में मजबूत एंटीबॉडीज का होना काफी जरूरी हो जाता है। शरीर में एंटीबॉडीज तभी मजबूत हो पाएंगी जब सभी लोग कोविड वैक्सीन की दोनों डोज लेंगे। कोरोना की तीसरी लहर से सुरक्षित रखने में वैक्सीन की दूसरी डोज की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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स्रोत और संदर्भ:
अस्वीकरण नोट: यह लेख नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें।