शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम तो जरूरी है ही साथ ही जरूरी है नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराते रहना। खराब जीवनशैली, खानपान में गड़बड़ी और तनाव के कारण कई बीमारियां बिना लक्षण के शरीर में पनपती रहती हैं, जिनका समय रहते पता लगाना जरूरी हो जाता है।
Health Alert: ब्लड टेस्ट में बार-बार आ रहा है हाई ट्राइग्लिसराइड? हो जाएं सावधान, आपके ये तीन अंग खतरे में
हाई ट्राइग्लिसराइड का असर सिर्फ दिल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। सबसे बड़ा खतरा हृदय रोग का होता है, क्योंकि यह एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर धमनियों को सख्त और संकरी बना देता है। इसके अलावा दो और अंगों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
पहले जान लीजिए ट्राइग्लिसराइड होता क्या है?
ट्राइग्लिसराइड एक तरह का फैट है, जो शरीर को ऊर्जा देने के लिए जरूरी माना जाता है। जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाली चीजें खाते हैं तो इससे ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ने लग जाता है। शरीर में अतिरिक्त कैलोरी, अल्कोहल और शुगर ट्राइग्लिसराइड्स में बदल जाते हैं। ज्यादा तला-भुना और मीठा खाना, जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें भी ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
अगर खून में इसका स्तर 150 mg/dL से ऊपर चला जाए तो इसे हाई ट्राइग्लिसराइड माना जाता है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खून की जांच में अक्सर लोग सिर्फ कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान देते हैं, लेकिन ट्राइग्लिसराइड की अनदेखी भारी पड़ सकती है। जिन लोगों का ट्राइग्लिसराइड लेवल अक्सर 150 से ऊपर बना रहता है उन्हें अलर्ट हो जाना चाहिए।
- ट्राइग्लिसराइड लेवल 200 के पार जाने पर दिल की धमनियों में चर्बी जमने लगती है।
- कार्डियोलॉजिस्ट डॉ वी.के. रस्तोगी बताते हैं, लिपिड प्रोफाइल में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दोनों बढ़े हों तो जटिलताएं और ज्यादा हो सकती हैं।
- ट्राइग्लिसराइड बढ़ने से सबसे बड़ा खतरा हृदय रोग का होता है, क्योंकि यह बैड कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर धमनियों को सख्त और संकरी बना देता है।
- दिल की सेहत के साथ-साथ हाई ट्राइग्लिसराइड वाले लोगों के शरीर के कई अन्य अंगों पर भी असर पड़ सकता है।
दिल के साथ इन अंगों को भी खतरा
डॉ रस्तोगी कहते हैं, हाई ट्राइग्लिसराइड सिर्फ दिल की सेहत के लिए खतरा नहीं है। इसका असर लिवर और पैंक्रियाज पर भी पड़ता है। ट्राइग्लिसराइड ज्यादा होने से फैटी लीवर की समस्या पैदा होती है।
- डायबिटीज के मरीजों में यह और तेजी से बढ़ता है। 500 से ऊपर जाने पर पैंक्रियाटाइटिस जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है।
- खास बात यह है कि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। यही वजह है कि मरीज तब डॉक्टर तक पहुंचता है, जब नुकसान हो चुका होता है।
- बहुत ज्यादा ट्राइग्लिसराइड होने पर पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है, जिसमें अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। इसके अलावा फैटी लिवर की समस्या भी हाई ट्राइग्लिसराइड से जुड़ी हुई है।
ट्राइग्लिसराइड को कैसे कंट्रोल किया जाए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते है, कुछ सावधानियां बरतकर हाई ट्राइग्लिसराइड को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
- खान-पान में सुधार करना ट्राइग्लिसराइड को कंट्रोल करने के लिए सबसे जरूरी है। मक्खन, क्रीम, नॉनवेज, तला-भुना और मीठा इसका सबसे बड़ा दुश्मन है, इनका सेवन कम से कम करें।
- शराब और ज्यादा चीनी खाना भी ट्राइग्लिसराइड को बढ़ाने वाली हो सकती है।
- नियमित व्यायाम और वजन कंट्रोल करने से इसे काफी हद तक टाला जा सकता है।
- रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की जगह साबुत अनाज, फल, सब्जियां और फाइबर युक्त आहार लें। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली, अलसी और अखरोट ट्राइग्लिसराइड कम करने में मददगार माने जाते हैं।
- सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम करना कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दोनों को कंट्रोल रखने में मददगार है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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