दिल के दौरे का सबसे बड़ा लक्षण माना जाता है- सीने में तेज दर्द। अक्सर किसी फिल्मी दृश्य में जब कभी किसी को दिल का दौरा पड़ता है तो वो अपना सीना जोर से जकड़ लेता है, दर्द के मारे उनकी आंखों में घबराहट दिखने लगती है और वो जमीन पर गिर पड़ते हैं। हम सभी को लगता है कि दिल का दौरा पड़ने पर ऐसा ही अहसास होगा जैसे हमारे सीने को कुचला जा रहा है। ऐसी अनुभूति होती भी है, लेकिन हमेशा नहीं।
क्या होता है 'साइलेंट हार्ट अटैक', कहीं आपको भी तो नहीं आया है कभी?
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कई बार बहुत हल्का दर्द होता है और लोगों को लगता है कि अपच के कारण गैस की वजह से ये दर्द हो रहा है और फिर जब कभी अस्पताल में ईसीजी होता है तब पता चलता है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है।
सीने में दर्द नहीं होता
2016 में प्रकाशित एक शोध अध्ययन के मुताबिक दिल के दौरे के 45 फीसदी मामले साइलेंट हार्ट अटैक के हो सकते हैं। हालांकि, शोध के लिए ये आंकड़े 1990 से इकट्ठे किए जा रहे हैं और तब से अब तक दिल के दौरों के निदान में काफी सुधार आया है। इसलिए हो सकता है कि सच्चाई इतनी भयावह न हो, लेकिन अब भी बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें पता ही नहीं चल पाता कि उन्हें दिल का दौरा पड़ रहा है।
कई बार मरीज को जबड़े, गर्दन, बांह, पेट या पीठ में दर्द होता है, सांस लेने में तकलीफ होती है, कमजोरी महसूस होती है, चक्कर आते हैं, पसीना आता है, उल्टियां आती हैं- लेकिन सीने में भयंकर दर्द नहीं होता और वे समझ नहीं पाते कि दरअसल उन्हें दिल की बीमारी है।
महिलाओं में अधिक दर्द
आमतौर पर माना जाता है कि सीने में दर्द के बिना दिल का दौरा पड़ने के मामले महिलाओं में ज्यादा होते हैं, जिससे उन्हें देर से डॉक्टरी मदद मिल पाती है और उनके बचने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। इस मान्यता की सच्चाई जांचने के लिए कनाडा के शोधकर्ताओं ने 2009 में दिल के दौरे के लक्षणों को मापने के लिए एंजियोप्लास्टी कराने वाले 305 मरीजों का अध्ययन किया था।
एंजियोप्लास्टी में बंद रक्तवाहिनी में एक छोटा गुब्बारा डालकर उसे फुलाया जाता है ताकि उसे फिर से खोला जा सके। इस प्रक्रिया के लक्षण दिल के दौरे के लक्षण से कुछ मिलते-जुलते हैं। इसलिए शोध के दौरान जब रक्तवाहिनी के अंदर गुब्बारा फुलाया गया तो मरीजों से पूछा गया कि उन्हें क्या महसूस हो रहा है। सीने में बेचैनी, बांह में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, पसीना आने या मतली आने जैसे लक्षण पुरुषों और स्त्रियों में एक जैसे थे, लेकिन महिलाओं ने सीने में दर्द के साथ-साथ गर्दन और जबड़े में दर्द की शिकायत पुरुषों के मुक़ाबले ज्यादा की।
कुछ और भी अध्ययन किए गए, लेकिन इस मान्यता को लेकर कोई ठोस नतीजे नहीं निकले। फिर 2011 में एक व्यापक समीक्षा की गई, जिसका एकमात्र उद्देश्य यह समझना था कि क्या दिल के दौरे के संबंध में महिलाओं और पुरुषों के अनुभव में कोई अंतर है। समीक्षा में अमेरिका, जापान, स्वीडन, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान और कनाडा के अध्ययनों को शामिल किया गया था। इस सबसे बड़े अध्ययन में 9 लाख से भी अधिक दिल के रोगियों की समीक्षा की गई थी। 26 सर्वोत्तम अध्ययनों के आंकड़े लिए गए, उन्हें आपस में मिलाया गया और फिर उनका दोबारा विश्लेषण किया गया।