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Aneurysm: दिल और दिमाग दोनों का दुश्मन है 'एन्यूरिज्म', हार्ट अटैक-स्ट्रोक का बढ़ा देता है खतरा

Thu, 02 Oct 2025 11:44 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 02 Oct 2025 11:44 AM IST
सार

  • हर साल दुनिया भर में लाखों लोग एन्यूरिज्म की वजह से स्ट्रोक या  हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं। समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं या कई बार बिल्कुल नहीं दिखाई देते, जिसके कारण इस तरफ लोगों का ध्यान भी कम जाता है।

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हार्ट - फोटो : Amarujala.com
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Aneurysm Risk: जब भी हृदय रोगों की बात होती है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में हार्ट-अटैक या कार्डियक अरेस्ट की  तस्वीर सामने आती है, पर हृदय रोग यहीं तक सीमित नहीं है। ये एक व्यापक स्वास्थ्य समस्या है जिसके बारे में समझना सभी लोगों के लिए जरूरी हो गया है।

एन्यूरिज्म हृदय स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर स्थिति मानी जाती है, पर अक्सर इसको लेकर न तो ज्यादा चर्चा होती है और न ही अधिकतर लोगों की इस समस्या का जानकारी होती है। डॉक्टरों के अनुसार, एन्यूरिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त नलिका की दीवारें कमजोर होकर फूल जाती है। यह देखने में मामूली लग सकता है, लेकिन अगर यह फट जाए तो जानलेवा साबित हो सकता है।

शोध बताते हैं कि हर साल दुनियाभर में लाखों लोग एन्यूरिज्म की वजह से स्ट्रोक या  हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं। समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं या कई बार बिल्कुल नहीं दिखाई देते, जिसके कारण इस तरफ लोगों का ध्यान भी कम जाता है।

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हृदय रोग- हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : adobe stock photos

एन्यूरिज्म की बढ़ती दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो एन्यूरिज्म की दिक्कत किसी को भी हो सकती है, पर कुछ स्थितियों में इसका खतरा बढ़ जाता है।  
40 साल से ऊपर के लोग, धूम्रपान करने वाले, हाई ब्लड प्रेशर के शिकार और जिनके परिवार में पहले से हृदय रोगों का इतिहास रहा हो, उनमें इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 

यहां समझना जरूरी है कि एन्यूरिज्म दिल या दिमाग किसी भी नस में हो सकता है। एन्यूरिज्म दिमाग में हो तो स्ट्रोक का खतरा और अगर यह हृदय की धमनियों में हो तो हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। 

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हार्ट एन्यूरिज्म की समस्या - फोटो : Adobe Stock

एन्यूरिज्म के जोखिमों को जानिए

हार्वर्ड की रिपोर्ट बताती है कि जब शरीर की कोई धमनी बहुत ज्यादा कमजोर हो जाती है, तो उसमें गुब्बारे जैसी सूजन बनने लगती है, इसे एन्यूरिज्म कहा जाता है। कई बार ये सूजन इतनी बड़ी भी हो जाती है कि धमनी फट सकती है। अगर यह फट जाए तो अचानक रक्तस्रोव हो सकता है जो जानलेवा हो सकती है।

अध्ययनों से पता चला है कि पुरुषों में एन्यूरिज्म की समस्या महिलाओं की तुलना में लगभग 2-3 गुना अधिक पाया गया है। जो लोग धूम्रपान करते हैं और लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे है, उनमें धमनियों की समस्या अधिक देखी जाती रही है। हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, और मोटापा से भी इसका खतरा बढ़ सकता है।

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ब्रेन में एन्यूरिज्म की स्थिति - फोटो : Freepik.com

एन्यूरिज्म को कैसे पहचानें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एन्यूरिज्म की शुरुआती स्थिति में कोई विशेष लक्षण नहीं दिखते, लेकिन कुछ संकेत हैं जिन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।

  • अगर यह दिमाग में हो तो अक्सर बहुत तेज सिरदर्द, उल्टी आने, आंखों में धुंधलापन या बोलने में दिक्कत जैसी समस्या हो सकती है। 
  • अगर यह दिक्कत दिल की धमनी में हो तो सीने में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ और धड़कनों का तेज होना महसूस हो सकता है। 
  • पैरों की धमनी में एन्यूरिज्म हो तो चलने में दिक्कत, पैरों में दर्द और सूजन जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
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तंबाकू-धूम्रपान से बना लें दूरी - फोटो : Freepik.com

इससे बचाव के लिए क्या किया जाए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र से लाइफस्टाइल और खान-पान को ठीक रखकर आप इसके जोखिमों से बचे रह सकते हैं। 

एन्यूरिज्म से बचाव के लिए धूम्रपान को छोड़ना सबसे जरूरी है। इसके अलावा नियमित व्यायाम करना, वजन को कंट्रोल रखना और हृदय को स्वस्थ रखने वाले आहार अपनाना भी जरूरी है। जिन लोगों में इसका आनुवंशिक रूप से जोखिम अधिक होता है उन्हें समय पर एन्यूरिज्म का पता लगाने और बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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