दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ वैक्सीनेशन के साथ-साथ कोविड उपयुक्त व्यवहार को प्रयोग में लाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। कोविड उपयुक्त बचाव के उपायों का मतलब अच्छी तरह से मास्क पहनना, हाथों को समय-समय पर धोते रहना और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते रहना है। इसमें भी मास्क पहनने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है, क्योंकि वायरस नाक और मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है, ऐसे मास्क पहनना ज्यादा कारगर माना जाता है। पर क्या सभी के लिए लगातार मास्क पहनकर रखना सही है? इस संबंध में हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बच्चों को मास्क पहनाने को लेकर माता-पिता का अलर्ट किया है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: बच्चों के लिए ज्यादा देर मास्क पहनना सुरक्षित नहीं, हो सकती है यह गंभीर समस्या
मास्क पहनने से बढ़ सकता है कार्बन-डाइऑक्साइड का स्तर
छोटे बच्चों को स्कूलों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में मास्क पहनाकर रखने के क्या प्रभाव हो सकते हैं? इस बारे में जानने के लिए पोलैंड, जर्मनी और ऑस्ट्रिया के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक अध्ययन किया गया। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ बच्चों में मास्क पहनने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर सामान्य सीमा से बारह गुना तक अधिक हो गया। इस अध्ययन के लिए 45 बच्चों को शामिल किया गया और सभी को दो से तीन मिनट कर मास्क पहनाकर उनका परीक्षण किया गया।
सामान्य से अधिक बढ़ सकती है कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा
जामा जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि तीन मिनट तक ही मास्क पहनकर रखने से भी बच्चे सांस के माध्यम से 0.04 प्रतिशत औसत कार्बन डाइऑक्साइड ले रहे हैं, जबकि इसका अधिकतम स्वस्थ स्तर 0.2 प्रतिशत ही है। शोधकर्ताओं ने पाया कि सभी आयु वर्ग के बच्चों में मास्क पहनने के बाद कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर, स्वस्थ स्तर से कहीं अधिक हो गया था। शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारे अध्ययन का सैंपल भले ही छोटा है, लेकिन अध्ययन में शामिल सभी बच्चों में मास्क पहनने के कारण कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर, स्वस्थ स्तर से कम से कम तीन गुना अधिक पाया गया है, जोकि निश्चित ही चिंता का विषय हो सकता है। कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ जाने से सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो सकती है, जो कई मामलों में घातक भी है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
शोधकर्ताओं का कहना है, हम इस बात को भी मानकर चल रहे हैं कि चूंकि यह अध्ययन प्रयोगशाला सेटिंग में किया गया था, इसलिए संभव है कि कुछ बच्चे आशंकित रहे हों और सामान्य तरीके से सांस नहीं ले रहे थे। हालांकि अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर यह जरूर कहा जा सकता है कि बच्चों के लिए ज्यादा देर तक मास्क पहनकर रखना अच्छे से कहीं ज्यादा बुरा प्रभाव डाल सकता है। इस बारे में स्वास्थ्य संगठनों को और गंभीरता से सोचने और निर्णय लेने की आवश्यकता है।
दोबारा से सोचें स्वास्थ्य संगठन
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि कोरोना संक्रमण से सुरक्षा देने में मास्क पहनना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, हालांकि बच्चों के लिए यह कितना सुरक्षित उपाय है इसपर फिर से विचार किया जाना चाहिए। फिलहाल अध्ययन के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि यह बच्चों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखने का स्थाई उपाय नहीं है, क्योंकि यह एक अन्य तरह की मुसीबत का कारण बन सकता है। संक्रमण से बचाव के लिए बच्चों को घरों से बाहर जाने से रोकें, जिससे उन्हें मास्क पहनाने की आवश्यकता कम से कम पड़े।
-------------
स्रोत और संदर्भ:
Experimental Assessment of Carbon Dioxide Content in Inhaled Air With or Without Face Masks in Healthy Children
अस्वीकरण नोट: यह लेख जामा जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं। अमर उजाला बच्चों को मास्क न पहनाने से संबंधित किसी तरह की अपील नहीं करता है।