कोरोना वायरस की संभावित तीसरी लहर से लोगों को सुरक्षित करने के लिए देशभर में टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है। 21 जून से 18 साल से ऊपर के सभी लोगों के लिए मुफ्त टीकाकरण की शुरुआत हो चुकी है। वैक्सीनेशन को लेकर हाल ही में हुए कुछ अध्ययनों में इसके गंभीर साइड-इफेक्ट्स के बारे में लोगों को सचेत किया गया है। वैज्ञानिकों ने हालिया अध्ययन में बताया है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स के रूप में कुछ लोगों में गुलियन-बैरे सिंड्रोम नाम की गंभीर समस्या देखी जा रही है। तंत्रिका तंत्र से जुड़ी यह बीमारी गंभीर रूप में लोगों को लकवाग्रस्त भी बना सकती है।
अलर्ट: वैक्सीनेशन के बाद देखे गए गुलियन-बैरे सिंड्रोम के मामले, जानिए क्या है यह समस्या, कैसे करें बचाव?
क्या है गुलियन-बैरे सिंड्रोम की समस्या?
गुलियन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ विकार है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, परिधीय तंत्रिका तंत्र (पीएनएस) में स्वस्थ तंत्रिका कोशिकाओं पर हमला कर देती है। इस स्थिति के कारणों के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है, हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समस्या आमतौर पर किसी संक्रामक बीमारी जैसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट या आंतों में जलन) या फेफड़ों के संक्रमण के साथ शुरू हो सकती है। यह बेहद दुर्लभ प्रकार की बीमारी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर एंड स्ट्रोक के अनुसार, अमेरिका में 1 लाख लोगों में से किसी एक व्यक्ति में इसके होने का खतरा रहता है।
गुलियन-बैरे सिंड्रोम के क्या लक्षण होते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह ऑटोइम्यून बीमारी परिधीय तंत्रिका तंत्र में स्वस्थ तंत्रिका कोशिकाओं पर हमला करती हैं। परिधीय तंत्रिका तंत्र की नसें मस्तिष्क को शरीर के बाकी हिस्सों से जोड़ती हैं और मांसपेशियों को संकेत भेजती हैं। इन नसों के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण मस्तिष्क से प्राप्त संकेतों का मांसपेशियां जवाब नहीं दे पाती हैं। इस स्थिति में लोगों को हाथों और पैरों में झुनझुनी हो सकती है। गंभीर स्थिति में यह लकवा का कारण भी बन सकती है। गुलियन-बैरे सिंड्रोम के कारण लोगों को यह दिक्कतें भी हो सकती हैं।
- हाथ और पैर की उंगलियों में झुनझुनी या चुभन
- पैरों में मांसपेशियों की कमजोरी जो समय के साथ बढ़ सकती है।
- चलने में कठिनाई
- पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द
- पेशाब पर नियंत्रण न रख पाना।
- हृदय गति तेज हो जाना।
गुलियन-बैरे सिंड्रोम की समस्या क्यों होती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक गुलियन-बैरे सिंड्रोम का सही कारण ज्ञात नहीं है। आमतौर पर श्वसन या पाचन तंत्र के संक्रमण के कुछ दिनों या हफ्तों के बाद इसके लक्षण देखे जा सकते हैं। कुछ लोगों में सर्जरी या टीकाकरण के बाद भी इस तरह की समस्या हो सकती है। जीका वायरस संक्रमण के बाद इसके कुछ मामले सामने आए थे। कोविड-19 संक्रमण और इसके टीकाकरण के बाद भी इस तरह की समस्या हो सकती है।
गुलियन-बैरे सिंड्रोम का इलाज कैसे होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक गुलियन-बैरे सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है। हालांकि इसको ठीक करने के लिए प्लास्मफेरेसिस या इम्युनोग्लोबुलिन थेरेपी को प्रयोग में लाया जा सकता है। प्लास्मफेरेसिस के दौरान रोगी के रक्त से उन एंटीबॉडी को निकाला जाता है जो नसों पर हमला कर सकती हैं। वहीं इम्युनोग्लोबुलिन थेरेपी में रोगी को इम्युनोग्लोबुलिन की हाई डोज देकर गुलियन-बैरे सिंड्रोम का कारण बनने वाली एंटीबॉडी को अवरुद्ध किया जाता है।
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स्रोत और संदर्भ:
Guillain-Barre syndrome
अस्वीकरण नोट: यह लेख मेडिकल से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट और जर्नल मायोक्लीनिक से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। बीमारी के बारे में विस्तार से जानने के लिए किसी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।