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नार्कोलेप्सी: खतरनाक है यह बीमारी, मरीज को जागते हुए पड़ते हैं नींद के दौरे, जानिए इसके कारण

Thu, 24 Jun 2021 05:12 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 24 Jun 2021 05:12 PM IST
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Chronic sleep disorder Narcolepsy Symptoms causes and treatment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik



डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)


सोना यानी नींद किसे पसंद नहीं। दुनिया में अधिकतर ऐसे लोग होंगे, जिन्हें सोना बाकी सभी कामों से अच्छा लगता है। खासकर छुट्टी के दिन, जब ऑफिस जाने का दबाव न हो, तो व्यक्ति आराम से सोता है। लेकिन क्या हो जब नींद ही आपकी दुश्मन बन जाए? जी हां, यह एक बीमारी है, जिसमें लोगों को जागते हुए नींद के दौरे पड़ते हैं। लोग चाह कर भी खुद को जहां-तहां और बेसमय सोने से रोक नहीं पाते हैं। इस बीमारी को नार्कोलेप्सी कहा जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति का शरीर तय समय के हिसाब से नहीं चलता है, यानी उसे जब-तब, जहां-तहां नींद आ जाती है। आमतौर पर लोग रात में छह से आठ घंटे की नींद लेते हैं, पर इस बीमारी से पीड़ित लोगों के साथ ऐसा नहीं होता। वो दिन में कई बार सोते हैं, कहीं भी, कभी भी। कभी-कभी तो उनकी नींद महज कुछ सेकेंड के लिए होती है। 

Chronic sleep disorder Narcolepsy Symptoms causes and treatment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विशेषज्ञ कहते हैं कि नार्कोलेप्सी एक दिमागी बीमारी है, जो लंबे समय तक चलती है। इसमें व्यक्ति का मस्तिष्क, नींद चक्र पर से नियंत्रण खो देता है और ऐसे में व्यक्ति को कभी भी नींद आने लगती है। इसे खतरनाक बीमारी इसलिए माना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित व्यक्ति एकाएक सो जाता है, उसे अचानक नींद आ जाती है। ऐसे में दुर्घटना की संभावना अधिक होती है, अगर पीड़ित व्यक्ति गाड़ी चला रहा हो या कहीं बैठा हो। 

Chronic sleep disorder Narcolepsy Symptoms causes and treatment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

नार्कोलेप्सी से पीड़ित मरीजों में स्लिपिंग पैरालाइसिस की परेशानी भी देखने को मिलती है, जिसमें व्यक्ति सोने और जागने के समय कुछ देर के लिए बोलने और चलने-फिरने में असक्षम हो जाता है। वह अपने हाथ-पैर भी हिला नहीं पाता है। इस बीमारी में व्यक्ति सोने के दौरान और जागने से पहले सपने भी खूब देखता है। 

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Chronic sleep disorder Narcolepsy Symptoms causes and treatment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

क्यों होती है यह बीमारी? 

  • इस बीमारी का कारण पूरी तरह से अब तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अधिकतर मामलों में यह देखा गया है कि पीड़ित व्यक्ति में हायपोक्रिटन हार्मोन की कमी होती है, जिसे ऑरेक्जिन भी कहते हैं। यह हार्मोन दिमाग को जगाए रखने में मदद करता है। इस बीमारी के होने की संभावना तब बढ़ जाती है, जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इस हार्मोन को पैदा करने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करती है। 
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Chronic sleep disorder Narcolepsy Symptoms causes and treatment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

इस बीमारी का इलाज क्या है? 

  • विशेषज्ञ कहते हैं कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन कुछ दवाइयों की मदद से इसके असर और प्रभाव को कम जरूर किया जा सकता है। दिन में नींद के दौरे को कम करने का सबसे बेहतर तरीका एक निश्चित समय अंतराल पर सोने की कोशिश को माना जाता है। डॉक्टर कुछ दवाइयों की मदद से पीड़ित मरीज को दिन में जगाए रखने की कोशिश करते हैं। 

नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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