कोरोना संक्रमण पिछले चार साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बना हुआ है। वर्ल्डोमीटर कोरोना अपडेट्स के अनुसार अब तक दुनियाभर में 70 करोड़ से अधिक लोग इस संक्रामक रोग के शिकार हो चुके हैं। संक्रमण और इसके गंभीर जोखिमों के कारण 70 लाख से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है।
Covid19: मिल गई कोरोना की असरदार दवा? अध्ययन में दावा- इससे अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 85% तक हो सकेगा कम
अस्पताल में भर्ती होने से बचाने वाली दवा
हालिया अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, पैक्सलोविड दवा का उपयोग करने वाले रोगियों में कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 84% कम देखा गया। इस दवा को संयुक्त राज्य अमेरिका में 12 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, जिन्हें संक्रमण होने का खतरा है उनके लिए प्रयोग में लाया जा रहा है।
जर्नल ऑफ एंटीमाइक्रोबियल कीमोथेरेपी में प्रकाशित शोध की रिपोर्ट में इस दवा की प्रभाविकता को लेकर दावा किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स को लगता है कि रोग गंभीर रूप ले रही है तो इस दवा को इलाज में शामिल करके खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के लेखकों ने जनवरी से अगस्त 2022 तक लगभग 45,000 रोगियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच की, जिनकी कोविड-19 की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। अध्ययन में शामिल रोगियों की औसत आयु 47 थी, जिसमें 62% श्वेत और 24% अश्वेत थे। 51 फीसदी लोगों को अध्ययन शुरू होने से पहले वैक्सीन की दो या अधिक टीके लग चुके थे।
अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों में से 201 लोगों को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 28 दिनों के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
90 फीसदी तक कम हो सकता है गंभीर रोग का खतरा
शोध के दौरान अध्ययन समूह में लगभग 5,000 लोगों को पैक्स्लोविड दिया गया। मिनेसोटा यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में बताया गया, जिन मरीजों को इलाज के दौरान पैक्सलोविड दिया गया उनमें अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम था।
अध्ययन के लेखकों ने कहा, यह शोध तब किया गया जब दुनियाभर में ओमिक्रॉन प्रमुख रूप से कोरोना वैरिएंट था। इस दवा ने संक्रमितों में गंभीर रोग की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को 85-90 फीसदी तक कम कर दिया। इन परिणामों से पता चलता है कि पैक्सलोविड की मदद से संक्रमण की गंभीरता को कम करने में मदद मिल सकती है।
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस दौरान इस दवा पर अध्ययन किया गया है उस समय ओमिक्रॉन और इसके अन्य सब-वैरिएंट्स सक्रिय थे। ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की संक्रामकता दर तो अधिक रही है पर इसके कारण गंभीर रोगों का खतरा कम देखा जाता रहा है। ये दवा गंभीर रोगकारक वैरिएंट्स जैसे डेल्टा और अन्य पर कितनी असरदार हो सकती है, इसपर शोध किया जाना शेष है।
अध्ययनकर्ताओं ने सलाह दी है कि इन दवाओं का इस्तेमाल कोविड मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। खुद से या बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के इनका उपयोग बिल्कुल न करें। फिलहाल कोरोना की स्थिति में गंभीर रोगों का खतरा सिर्फ उन्हीं लोगों में देखा जा रहा है जो या तो कोमोरबिडीटी के शिकार हैं या फिर जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ है।
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स्रोत और संदर्भ
COVID-19 hospitalization risk after outpatient nirmatrelvir/ritonavir use, January to August 2022, North Carolina
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