सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी कि निष्क्रिय जीवनशैली को स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर रोग कारकों में से एक मानते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने या अधिकतर समय लेटे रहने की आदत के अलावा दिनचर्या में व्यायाम की कमी के कारण जीवनशैली की निष्क्रियता और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनकर्ता इसे गंभीर हृदय रोग और कुछ स्थितियों में हार्ट अटैक-स्ट्रोक, डायबिटीज की जटिलताओं, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्रमुख कारक के तौर पर मानते हैं। सेडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
Health Tips: सेडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण जानलेवा समस्याओं का खतरा, इन अंगों पर होता है सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव
गतिहीन जीवनशैली के दुष्प्रभाव
शोधकर्ताओं ने पाया कि गतिहीन जीवनशैली आपमें कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने का कारण हो सकती है। इसके कारण कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जो जानलेवा तक हो सकती हैं। डॉक्टर्स कहते हैं, मौजूदा समय की ज्यादातर बीमारियों के लिए सेडेंटरी लाइफस्टाइल को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है। इससे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, कुछ प्रकार के कैंसर, हृदय रोग के जोखिम प्रमुख हैं।
समय से पहले मृत्यु का खतरा
अगर आप लंबी जिंदगी चाहते हैं तो शारीरिक निष्क्रियता को कम करने के लिए प्रयास बहुत आवश्यक हैं। इसे समय से पहले मृत्यु के प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर भी जाना जाता है। एक अध्ययन के आंकड़ों के विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने पाया कि गतिहीन जीवनशैली वाले लोगों की औसत आयु, नियमित योग-व्यायाम करने वालों की तुलना में कम होती है। गतिहीन जीवनशैली वालों में हार्ट अटैक का जोखिम अधिक देखा गया है जो समय से पहले मृत्यु का कारण बन सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर
गतिहीन जीवनशैली का मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 10,381 प्रतिभागियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि गतिहीन जीवनशैली वाले लोगों में समय के साथ अवसाद की समस्या विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने पाया कि शारीरिक सक्रियता कम होने से खुशी बढ़ाने वाले हार्मोन्स का स्राव भी कम हो जाता है, जिसके कारण आपका मूड प्रभावित रहता है।
शरीर को रखें फिट और सक्रिय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों के लिए नियमित रूप से व्यायाम-योग करने की आवश्यकता है। शोध से पता चला है कि व्यायाम और खेल सहित अन्य शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और समय से पहले मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है। सभी वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट के व्यायाम जरूर करना चाहिए।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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