स्वस्थ जीवन के लिए बचपन के पोषण को आधार माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए बचपन से ही आहार और स्वस्थ पोषण पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। हम जिस तरह के आहार और दिनचर्या का पालन करते हैं, उसका सीधा असर सेहत पर होता है। बच्चों के मामले में इसपर ध्यान देना और भी आवश्यक हो जाता है। यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रन इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) वैश्विक स्तर पर बच्चों के स्वस्थ पोषण की आवश्यकताओं को लेकर जोर देता रहा है।
UNICEF: बचपन की इन गड़बड़ आदतों के हो सकते हैं दीर्घकालिक दुष्प्रभाव, माता-पिता विशेष ध्यान दें
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अमृता सहाय बताती हैं, शहरी परिवेश और बढ़ती तकनीकr सुविधाओं ने हमारी दिनचर्या को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। वयस्कों के साथ-साथ बच्चों में भी इसका असर साफ देखा जा रहा। शारीरिक निष्क्रियता की कमी, ज्यादातर समय गैजेट्स से चिपके रहने की आदत, रात में देर से सोना. खान-पान में गड़बड़ी के मामले ज्यादातर बच्चों में देखे जा रहे हैं। इसका असर अभी से उनकी सेहत पर दिखने लगा है। यह भविष्य के लिए गंभीर चुनौतियों का कारण बन सकता है।
बच्चों में जंक फूड्स की बढ़ती आदत
डॉ अमृता कहती हैं आहर की पौष्टिकता का ध्यान रखना सभी के लिए आवश्यक है, बच्चों के लिए खासतौर से, क्योंकि यह उनके शारीरिक-मानसिक विकास का समय होता है। जंक फूड्स के कारण बच्चों में मोटापे की समस्या बढ़ रही है, जिसे कई प्रकार के रोगों के प्रमुख कारण के तौर पर जाना जाता है। इसके अलावा जंक फूड्स में नमक की मात्रा भी अधिक होती है जिसके कारण रक्तचाप की समस्या हो सकती है। इस तरह के आहार बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी के लिए नुकसानदायक हैं।
स्क्रीनटाइम बढ़ने के साइड-इफेक्ट्स
बच्चों का मोबाइल-कंप्यूटर और टीवी जैसे स्क्रीन के अधिक संपर्क में रहना उनके शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए नुकसानदायक है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के कारण आंखों की गंभीर समस्याओं के विकसित होने का जोखिम रहता है, बच्चों में चश्मा लगने के लिए यह एक प्रमुख कारणों में से है।
इसके अलावा स्क्रीन टाइम बढ़ना, बच्चों के सामाजिक कौशल और सीखने की क्षमता को भी कम करता हुआ देखा गया है। यह नींद की समस्याओं का भी कारण बनता है।
रात में देर से सोने की आदत
स्लीप साइकिल पर ध्यान देना सभी उम्र के लोगों के लिए आवश्यक है। रात में देर से सोना या नींद पूरी न होने के कारण न सिर्फ कई तरह की हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं, साथ ही इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर देखा गया है। 10 साल से कम आयु के बच्चों के लिए रात में 7-9 घंटे की निर्बाध नींद आवश्यक है, इसमें कमी के कराण थकान, मूड की समस्या और दीर्घकालिक तौर पर इसका हृदय स्वास्थ्य पर भी असर देखा गया है।