दुनियाभर में पिछले करीब दो साल से जारी कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन ने लंबे समय तक लोगों को घरों में रहने को मजबूर कर दिया। एहतियात को तौर पर कॉलेज और कार्यालयों के काम घर से होने शुरू हुए। वर्क फ्रॉम होम के इस कल्चर ने एक ओर जहां लोगों को कोरोना महामारी से सुरक्षित रहने में भूमिका निभाई वहीं इसके कारण शारीरिक निष्क्रियता, अस्वास्थ्यकर आहार, मेटाबॉलिज्म संबंधी विकार और मोटापे का खतरा बढ़ गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञ वर्क फ्रॉम होम के दौरान जीवनशैली में आए बदलाव को सेहत के लिए काफी गंभीर मानते हैं।
सावधान: जानलेवा हो सकती है आपकी यह आदत, वर्क फ्रॉम होम करने वाले लोगों में बढ़ गया है खतरा
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अध्ययन में क्या पता चला?
स्ट्रोक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि एक ही स्थान पर दिन में आठ घंटे से अधिक समय तक बैठे रहने जैसी आदतों के चलते स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकता है। शारीरिक निष्क्रियता के कारण स्ट्रोक का जोखिम सात गुना तक बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक वर्क फ्रॉम होम करने वाले ज्यादातर लोगों की जीवनशैली ऐसी हो गई है जिसमें शारीरिक निष्क्रियता काफी बढ़ गई है।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार शारीरिक निष्क्रियता या सेडेंट्री लाइफस्टाइल के कारण शरीर में होने वाला रक्त प्रवाह, लिपिड मेटाबॉलिज्म और ग्लूकोज का स्तर प्रभावित होने के साथ और सूजन की समस्या बढ़ जाती है। समय के साथ ऐसी स्थितियां रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं जिससे दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इन दोनों ही स्थितियों को सामान्यत: जानलेवा माना जाती है।
इस जोखिम को कैसे कम करें?
अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक लंबे समय से घर से काम कर रहे लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधान रहने की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों के लिए नियमित योग और व्यायाम करना सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है। व्यायाम के माध्यम से इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, वयस्कों को हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट का मध्यम स्तरीय व्यायाम अवश्य करना चाहिए। व्यायाम करके दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।