कोरोना महामारी को ढाई साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अबतक इससे जुड़े कई सवाल किसी पहेली से कम नहीं हैं। यह महामारी कब खत्म होगी, क्या मौसम के आधार पर संक्रमण के मामले बढ़ने लगते हैं? ऐसे कई सवाल अब भी लोगों के मन में हैं, जिनका अध्ययनों से भी कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया है। कुछ ही दिनों के बाद देश में शरद ऋतु की शुरुआत होने वाली है, ऐसे में एक बार फिर से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या सर्दी का मौसम आते ही कोरोना के मामले और इसकी गंभीरता बढ़ने लगेगी?
Covid-19: क्या सर्दी का मौसम आते ही दोबारा बढ़ने लगेगा संक्रमण? WHO की इस चेतावनी पर ध्यान देने की जरूरत
क्या कहता है डब्ल्यूएचओ?
इसी हफ्ते संवाददाताओं से एक बातचीत के दौरान डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेसियस ने कहा कि विश्व स्तर पर कोविड -19 से मौत के मामलों में जरूर कमी देखी जा रही है। हालांकि कई देशों में ठंड का मौसम आ रहा है, ऐसे में आने वाले महीनों में एक बार फिर से संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। इसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। पहले भी ठंड के मौसम में संक्रमण के मामलों में इजाफा देखने को मिला है।
नए वैरिएंट्स बढ़ा रहे हैं चिंता
कोरोना के नए वैरिएंट्स को लेकर चिंता जाहिर करते हुए डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि ओमिक्रॉन के मौजूदा सब-वैरिएंट, पहले के वैरिएंट्स के मुकाबले अधिक संक्रामकता वाले हैं। इनसे और भी खतरनाक वैरिएंट्स के उभरने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर अभी भी अधिक जोखिम वाले लोगों में टीकाकरण कवरेज बहुत कम है, खासकर कम आय वाले देशों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। इसके कारण संक्रमण के बढ़ने और वायरस में म्यूटेशन के साथ नए खतरों के उभरने का संकट बना हुआ है, जिसको लेकर सभी को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। कोविड के मामले भले ही कम हो गए हैं पर, संक्रमण खत्म नहीं हुआ है इस बात का सभी को ध्यान रखना चाहिए।
ठंड के मौसम में बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा
मौसम आधारित कोरोनावायरस के संक्रमण को लेकर नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डेविड रेलमैन कहते हैं, सर्दी के मौसम में कोरोना के अधिक संक्रामक होने के मामले देखे गए हैं। इन्फ्लूएंजा जैसे श्वसन संक्रमण का कारण बनने वाले वैरिएंट्स की संक्रामकता प्रकृति सर्दियों के मौसम में बदल जाती है। प्रयोगशाला अध्ययनों से पता चलता है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस भी ठंड और शुष्क परिस्थितियों में अधिक संक्रामकता का कारण बन सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल कोरोना के जिस प्रकार से अति संक्रामक वैरिएंट्स के मामले देखने को मिलते रहे हैं, वह भले ही हल्के लक्षणों वाले हों पर फिर भी हम सभी को इसके खतरे को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर संक्रमण के मामलों पर रोक नहीं लगाई जाती है तो इन वैरिएंट्स में और भी म्यूटेशन हो सकता है, जिससे और भी गंभीर वैरिएंट्स आने का खतरा हो सकता है।
इस तरह के संकट से बचाव के लिए सभी लोगों को लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना जरूरी है। भले ही आपका वैक्सीनेशन हो चुका है, कोविड से बचाव के उपायों का पालन करते रहें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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