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Research: दूर का ठीक से न देख पाने वालों को होती है अनिद्रा की समस्या, शोध में हुआ साबित

Thu, 27 May 2021 05:26 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तेजस्वी मेहता Updated Thu, 27 May 2021 05:26 PM IST
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Research: people with myopia may suffer from insomnia in hindi
अच्छी नींद के लिए जिम्मेदार होता है - फोटो : Pixabay

हाल ही में हुए एक शोध में नींद और दूर दृष्टि में धुंधलेपन को लेकर एक नया निष्कर्ष सामने आया है, जो कि बहुत महत्वपूर्ण है। फ्लिंडर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को दूर का देखने में समस्या होती है उनकी नींद सामान्य दृष्टि वाले लोगों की तुलना में बहुत खराब होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन लोगों में मेलाटोनिन का उत्पादन ठीक से नहीं होता है। मेलाटोनिन वो हार्मोन है, जो कि हमारी अच्छी नींद के लिए जिम्मेदार होता है। लगभग 30 प्रतिशत युवा और 10 प्रतिशत बच्चे इस समस्या से परेशान हैं। अगली स्लाइड्स से जानिए शोध से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें। 


 

 

Research: people with myopia may suffer from insomnia in hindi
नींद के पैटर्न को नियंत्रित करता है - फोटो : iStock

क्या है मेलाटोनिन?
मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो कि हमारे शरीर में खुद से बनता है। यह हमारी नींद के पैटर्न को नियंत्रित करता है। मानव निर्मित मेलाटोनिन लेने पर अनिद्रा की समस्या दूर होती है और रात में बार-बार नींद भी नहीं खुलती है। इसका प्रयोग 55 वर्ष से ऊपर के लोगों की नींद से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए भी किया जाता है। 

Research: people with myopia may suffer from insomnia in hindi
24 घंटे की दिनचर्या पर ध्यान रख गया - फोटो : social media

मेलाटोनिन उत्पादन स्तर को देखा 
शोध में शोधकर्ताओं ने ऐसे विद्यार्थियों को शामिल किया जिनमें से कुछ की दृष्टि एकदम सही थी और कुछ को दूर का देखने में समस्या थी। ऐसे विद्यार्थियों की 24 घंटे की दिनचर्या पर ध्यान रख गया, साथ ही इनमें मेलाटोनिन के उत्पादन के स्तर को भी देखा गया। नतीजन पाया गया कि जिन लोगों को दूर का ठीक से दिखाई नहीं देता है उनका सलाइवा और यूरिन में मेलाटोनिन की मात्रा सामान्य दृष्टि वाले विद्यार्थियों की तुलना में कम मिली है। 

 

 

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Research: people with myopia may suffer from insomnia in hindi
सर्केडियन रिदम में इस तरह का विघटन पहले देखने में नहीं आया है - फोटो : सोशल मीडिया

ताजा निष्कर्ष आया है सामने
इस शोध के मुख्य शोधकर्ता डॉ रंजय चक्रबर्ती का कहना है कि विद्यार्थियों की सर्केडियन रिदम में इस तरह का विघटन पहले देखने में नहीं आया है। इससे पहले के शोधों में यह जरूर सामने आया है कि कृत्रिम प्रकाश और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अधिक प्रयोग से जरूर उन लोगों के शरीर पर प्रभाव पड़ता है जिन्हें कि दूर का ठीक से दिखाई नहीं देता है लेकिन यह शोध का निष्कर्ष एकदम ताजा है। 

 

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दूर की दृष्टि खराब नहीं होगी - फोटो : पीटीआई
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से रखा जाए दूर
शोध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि व्यवस्थित दिनचर्या और सर्केडियन रिदम न सिर्फ अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है बल्कि अच्छी दृष्टि के लिए भी बहुत जरूरी है। बच्चों को अच्छी नींद आए और उनकी आंखों की दृष्टि अच्छी रहे, इसके लिए बहुत जरूरी है कि उन्हें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर ही रखा जाए। ऐसा करने से आगे चलकर उनकी दूर की दृष्टि खराब नहीं होगी। साथ ही उनमें मेलाटोनिन के उत्पादन को लेकर भी समस्याएं नहीं रहेगी।

स्रोत: https://www.dailymail.co.uk/sciencetech/article-9617347/People-short-sighted-sleep-WORSE-normal-vision-study-finds.html?ito=whatsapp_share_article-top
अस्वीकरण नोट:
 यह लेख डेली मेल ऑनलाइन में प्रकाशित स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह के बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

 
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