बालों का सफेद होना आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होने वाला बदलाव माना जाता है। लेकिन जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसने कम उम्र वालों में भी ये दिक्कत बढ़ा दी है। 20-30 की उम्र में ही बाल सफेद होने के पीछे आनुवंशिकता या तनाव को भी जिम्मेदार माना जाता है।
चिंता: सफेद बाल सिर्फ बढ़ती उम्र की निशानी नहीं, इन बीमारियों से भी हो सकता है कनेक्शन
कम उम्र में बाल सफेद होना हमेशा उम्र बढ़ने का सामान्य असर नहीं होता। आनुवंशिकता इसकी बड़ी वजह हो सकती है, लेकिन विटामिन बी12 जैसी पोषण संबंधी कमी, थायरॉइड विकार और कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां भी इससे जुड़ी हो सकती हैं।
थायरॉइड की गड़बड़ी
थायरॉइड हार्मोन शरीर के कई जरूरी कामों को प्रभावित करते हैं और इसका असर त्वचा तथा बालों की सेहत पर भी पड़ सकता है। थायरॉइड से जुड़ी गड़बड़ी के कारण बालों के झड़ने, रूखापन और बालों की बनावट में बदलाव जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं।
- कुछ अध्ययनों में थायरॉइड विकारों और समय से पहले बाल सफेद होने के बीच भी लिंक पाया गया है। अगर कम उम्र में बाल तेजी से सफेद होने के साथ लगातार थकान, वजन में बदलाव, दिल की धड़कन तेज होने या बाल झड़ने जैसी समस्याएं भी हैं, तो डॉक्ट से सलाह लेना जरूरी है।
एलोपेसिया एरीटा की समस्या
एलोपेसिया एरीटा एक ऑटोइम्यून स्थिति है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से बालों की जड़ों को प्रभावित करने लगती है, जिसके कारण सिर या शरीर के दूसरे हिस्सों में गोल या पैच के रूप में बाल झड़ सकते हैं। कुछ लोगों में इस स्थिति के कारण बाल सफेद या भूरे दिखाई देने लगते हैं। ये बीमारी बालों का रंग बनाने वाली कोशिकाओं को भी प्रभावित करती हैं।
विटामिन और खनिजों की कमी भी हो सकता है कारण
समय से पहले बाल सफेद होने में आनुवंशिकता की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन पोषण से जुड़ी कुछ कमियां भी इसका खतरा बढ़ा सकती हैं।
- विटामिन बी12 की कमी में समय से पहले बाल सफेद होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
- विटामिन बी12 शरीर में रक्त कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र के सामान्य काम के लिए जरूरी है और इसकी कमी होने पर कई दूसरे लक्षण भी सामने आ सकते हैं।
- कुछ शोध में विटामिन डी, कैल्शियम, आयरन, जिंक और कॉपर जैसे पोषक तत्वों की कमी का भी बालों की सेहत पर असर देखा गया है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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