Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik
शरीर में खुजली होना आम बात है। यह समस्या किसी को भी हो सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कोई खाने वाली चीज या दवा से एलर्जी से, त्वचा में रुखेपन से, गंदे कपड़े पहनने से, मच्छर या किसी कीड़े के काट लेने से, आदि। खुजली की वजह से कई बार त्वचा में जलन का अहसास भी होता है, जिसे खुजलाने पर आराम मिलता है। एक्जिमा भी खुजली की ही एक ऐसी स्थिति है, जिसमें त्वचा के कुछ हिस्से पर खुजली होने लगती है और वहां सूजन हो जाती है। हालांकि कुछ घरेलू उपायों की मदद से इस समस्या को कम किया जा सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि घरेलू उपायों से एक्जिमा पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती है, लेकिन खुजली के लक्षणों और जलन से राहत जरूर मिल सकती है। आइए जानते हैं इसके कुछ घरेलू उपायों के बारे में...
सलाह: खुजली और सूजन की समस्या से हैं परेशान, तो अपनाएं ये दमदार घरेलू नुस्खे
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शहद है दमदार घरेलू उपाय
- विशेषज्ञ कहते हैं कि शहद में जीवाणुरोधी गुण मौजूद होते हैं, ऐसे में यह विभिन्न प्रकार की त्वचा संबंधी बीमारियों के इलाज में उपयोगी है। अगर खुजली वाली जगह पर शहद लगाया जाए, तो इसकी मदद से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सेब का सिरका भी है फायदेमंद
- त्वचा संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए सेब का सिरका एक प्रभावी घरेलू उपाय है। नेशनल एक्जिमा एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक्जिमा से राहत दिलाने में मददगार हो सकता है। हालांकि इसके उपयोग के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होती है, नहीं तो इसमें मौजूद अम्ल त्वचा के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
एक्जिमा से राहत दिला सकता है एलोवेरा जेल
- एलोवेरा को 'चमत्कारी पौधा' माना जाता है, क्योंकि इसमें कई सारे गुण हैं, जो अनेक बीमारियों में फायदेमंद होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि एक्जिमा को शांत करने में एलोवेरा जेल बहुत उपयोगी है। इसमें मौजूद जीवाणुरोधी और रोगाणुरोधी गुण त्वचा के रूखेपन और फटी हुई त्वचा के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं।
नारियल तेल भी है उपयोगी
- नारियल का तेल स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। अगर लगातार आठ हफ्तों तक त्वचा पर नारियल तेल का उपयोग किया जाए, तो एक्जिमा के लक्षणों में सुधार देखने को मिल सकता है। एक अध्ययन में इसके प्रभाव देखने को मिले हैं। लेकिन ध्यान रहे कि जिन लोगों को नारियल से एलर्जी है, उन्हें नारियल तेल का उपयोग नहीं करना चाहिए।
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।