अगर पूछा जाए कि स्वस्थ होने का मतलब क्या है, तो ज्यादातर लोगों का जवाब होगा पतला शरीर और दिखने में बिल्कुल फिट होना। पर क्या सिर्फ बाहर से फिट दिखना इस बात की गारंटी है कि आप अंदर से भी स्वस्थ हैं?
चिंता: स्वस्थ और फिट दिखते हैं, फिर भी हो सकते हैं अंदर से बीमार? क्या है इसका कारण
बाहर से फिट और स्वस्थ दिखना हमेशा अंदर से स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर, प्री-डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर और किडनी की बीमारी शुरुआती दौर में बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती हैं। इसलिए जोखिम होने पर नियमित ब्लड प्रेशर, शुगर, लिपिड और जरूरी स्वास्थ्य जांच कराते रहना जरूरी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शरीर स्वस्थ दिखने पर भी हो सकता है बीमार
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हाई ब्लड प्रेशर के लंबे समय तक ज्यादातर लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है या नहीं, यह जानने का नियमित रूप से जांच कराते रहना जरूरी है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर का दिल-दिमाग, किडनी और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। ज्यादातर लोगों में बीपी की समस्या का पता भी तभी चल पाता है जब इसमें से कोई दिक्कत हो जाए।
- इसी तरह प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज भी शुरुआत में बिना किसी खास संकेत के रह सकती है। इसलिए केवल यह देखकर कि शरीर दुबला है, डायबिटीज के खतरे को खारिज नहीं किया जा सकता।
- शरीर के स्वस्थ दिखने के बावजूद आपको कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर जैसी कई दिक्कतें हो सकती हैं।
शरीर फिट दिखे फिर भी बढ़ा हो सकता है ब्लड प्रेशर
हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति में जिसमें धमनियों में खून का दबाव लगातार सामान्य से ज्यादा रहता है। इसकी सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता। इसलिए अक्सर लोग सामान्य दिखते हुए भी हाई ब्लड प्रेशर का मरीज हो सकता है।
- इसका खतरा अधिक ज्यादा वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है।
- शारीरिक गतिविधि कम होने, ज्यादा नमक वाला खानपान, धूम्रपान और ब्लड प्रेशर की फैमिली हिस्ट्री भी आपमें दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है।
शुगर बढ़े रहने पर भी दिख सकते हैं नॉर्मल
अगर आप स्वस्थ दिख रहे हैं तो भी डायबिटीज या प्री-डायबिटीज का शिकार हो सकते हैं।
- प्री-डायबिटीज में ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा रहता है लेकिन अभी डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंची होता है।
- यह समस्या कई साल तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज में अक्सर शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होते और ब्लड टेस्ट से ही स्थिति का पता चलता है।
फैटी लिवर और किडनी की बीमारी
कुछ अंदरूनी बीमारियां तो ऐसी हैं जिनमें लक्षण आने में काफी समय लग सकता है। मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज यानी एमएएसएलडी में लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होता है। यह समस्या आमतौर पर लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती है। मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और टाइप-2 डायबिटीज वालों में इसका खतरा अधिक होता है।
- इसी तरह किडनी की बीमारी भी धीरे-धीरे बढ़ती है। शुरुआती क्रॉनिक किडनी डिजीज में बहुत कम या कोई लक्षण नहीं होता।
- इसके कारण होने वाली कमजोरी, दर्द या पेशाब में बदलाव को आमतौर पर लोग इग्नोर करते रहते हैं जो बड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।