फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Covid-19 Study: अस्पताल में भर्ती करीब 7% रोगियों की एक साल के भीतर मौत, युवा आबादी सबसे ज्यादा शिकार

Mon, 28 Aug 2023 12:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 28 Aug 2023 12:18 PM IST
विज्ञापन
post-Covid conditions increase mortality rate, reason for fatalities after Covid infection
कोरोना के कारण मृत्यु का खतरा - फोटो : istock

कोरोना वैश्विक स्तर पर गंभीर रोग का खतरा बढ़ाते हुए देखा जा रहा है, हाल ही में सामने आए नए वैरिएंट्स के कारण रोग की संक्रामकता दर और अस्पताल में भर्ती मरीजों का संख्या भी बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को कोरोना से बचाव के लिए लगातार प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। नए वैरिएंट्स, ओमिक्रॉन का ही म्यूटेटेड वर्जन हैं, जिसके कारण गंभीर रोग का खतरा कम देखा जा रहा है, हालांकि जिस प्रकार से नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर और इसमें अतिरिक्त म्यूटेशन हैं इसके कारण तेजी से संक्रमण बढ़ने की आशंका अधिक हो सकती है। 



कोरोना किस प्रकार से स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन रहा है, इसके कारण फिलहाल मृत्यु का जोखिम कितना है, इस बारे में शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन में बड़ा दावा किया है। नेशनल क्लिनिकल रजिस्ट्री फॉर कोविड-19 (एनसीआरसी) द्वारा किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती करीब 6.5 फीसदी लोगों की एक साल के भीतर मौत हो गई।

यह अध्ययन कोरोना के बाद होने वाली जटिलताओं के बारे में लोगों को अलर्ट करता है। 

post-Covid conditions increase mortality rate, reason for fatalities after Covid infection
कोरोना और इसके जोखिम कारक - फोटो : istock

कोरोना के बाद मृत्यु का खतरा

एनसीआरसी के अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि कोरोना के बाद लोगों में कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं देखी जा रही है, जो उनमें मृत्यु के खतरे के बढ़ाने वाली हो सकती है। मृत्यु के आंकड़े युवाओं में अधिक देखे जा रहे हैं, इसमें भी पुरुषों की संख्या अधिक है। एनसीआरसी, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ही एक इकाई है, जिसने अध्ययन करके ये समझने की कोशिश की है कि एक वर्ष के बाद डिस्चार्ज लोगों में मृत्यु दर से संबंधित क्या कारक हो सकते हैं? 

post-Covid conditions increase mortality rate, reason for fatalities after Covid infection
कोरोना के कारण गंभीर रोगों का खतरा - फोटो : Pixabay

अध्ययन में क्या पता चला?

एनसीआरसी ने सितंबर 2020 से फरवरी 2023 तक का डेटा एकत्र किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर लोगों में मृत्यु का प्रमुख कारण पोस्ट कोविड कंडिशन (पीसीसी) हैं, इसमें कोऐग्युलेशन से संबंधित असमान्यताएं (रक्त के थक्का बनने की समस्या) हैं जिसके कारण कार्डियक अरेस्ट और कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हुई देखी गई हैं जिनके जानलेवा दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के जोखिमों को हल्के में लेने की गलती नहीं की जानी चाहिए क्योंकि पोस्ट कोविड से संबंधित समस्याएं अब भी लोगों के लिए गंभीर दिक्कतों का कारण बन रही हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
post-Covid conditions increase mortality rate, reason for fatalities after Covid infection
कोरोना के कारण बढ़े हृदय रोगों के मामले - फोटो : istock

हृदय रोगों के मामले सबसे अधिक

कोरोना संक्रमित रहे लोगों में मौत का प्रमुख कारण हृदय से संबंधित समस्याएं हैं, इससे सबसे ज्यादा मौत के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। इसके अलावा लंग्स फाइब्रोसिस, थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म, किडनी और लिवर की समस्याएं हो सकती हैं। इस अध्ययन के लिए 14,419 रोगियों के डेटा का अध्ययन किया गया उनमें से 942 की अस्पताल से डिस्चार्ज के एक साल के भीतर मृत्यु हो गई, इसमें 325 महिलाएं और 616 पुरुष शामिल थे। मृतकों में से 175 (18.6 प्रतिशत) की उम्र 18-45 वर्ष थी।

हृदय रोगों के अलावा कई लोगों में किडनी और लंग्स पूरी तरह से काम करने बंद कर दिए जिसके कारण भी मृत्यु का खतरा अधिक देखा गया। 

विज्ञापन
post-Covid conditions increase mortality rate, reason for fatalities after Covid infection
वैक्सीनेटेड लोगों में कोरोना की गंभीरता का खतरा कम - फोटो : Istock

वैक्सीनेटेड लोगों में मृत्यु का खतरा कम 

अध्ययनकर्ताओं ने बताया मृत्यु का खतरा उन लोगों में कम था जिनका टीकाकरण हो चुका था। अध्ययन में कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण से पहले टीकाकरण की एक खुराक भी डिस्चार्ज के बाद मृत्यु के खतरे को 60 फीसदी तक कम कर सकती है। वैक्सीन के पहले शॉट के बाद मृत्युदर को रोकने के लिए टीकाकरण की प्रभावशीलता 168-185 दिनों के बाद कम हो गई, लेकिन तब भी यह 86 प्रतिशत तक प्रभावी थी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना के नए वैरिएंट्स के जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है, इसमें देखे जा रहे अतिरिक्त म्यूटेशन संक्रामकता दर को काफी तेजी से बढ़ाने वाली हो सकती है। 


--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed