दुनिया के कई देशों के पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े उठाकर देखें तो ऐसे लग रहा था कि पोलियो का संक्रमण अब काफी हद तक नियंत्रण में आ चुका है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इजराइल आदि देशों में भले ही संक्रमण के एकाध मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हों, पर स्थिति को काफी हद तक कंट्रोल में समझा जा रहा था। इसी बीच एक बार फिर से पोलियो ने कई देशों में खतरनाक तरीके से वापसी की है। विशेषतौर पर पाकिस्तान में पोलिया के गंभीर आउटब्रेक की खबर है। एक साल से अधिक समय से पाकिस्तान में पोलियो के एक भी नए मामले नहीं देखे गए थे, हालांकि अचानक से पिछले दो-तीन महीने में उत्तरी वजीरिस्तान जिले में करीब आठ बच्चों में संक्रमण की पुष्टि की गई है।
Polio Return: पाकिस्तान सहित कई पश्चिमी देशों में प्रकोप, क्या यह बड़े खतरे की घंटी है? जानिए भारत की स्थिति
पहले पोलियो संक्रमण और इसके कारणों के बारे में जानिए
पोलियोमाइलाइटिस जिसे आमतौर पर पोलियो कहा जाता है, यह पोलियो वायरस के कारण होने वाला एक गंभीर संक्रामक रोग है। इसके लगभग 70 फीसदी मामले एसिम्टोमैटिक या हल्के लक्षणों वाले होते हैं। यह वायरस संक्रमितों के गले और आंतों में पाया जाता है। संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने के कारण इसके संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है, छींक या खांसी से निकलने वाली बूंदों से भी यह दूसरे व्यक्ति में संक्रमण का कारण बन सकता है, हालांकि ऐसे मामले कम ही देखे जाते रहे हैं।
इस संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है। पोलियो वायरस के संक्रमण की गंभीर स्थितियों में इसका असर रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क पर भी हो सकता है, जिसके कारण संक्रमितों में लकवा होने का जोखिम रहता है।
पाकिस्तान में दोबारा कैसे बढ़ रहे हैं मामले?
पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में करीब एक साल बाद दोबारा से रिपोर्ट किए जा रहे पोलियो संक्रमण के मामले चिंता बढ़ाने वाले हैं। अधिकारियों का कहना है कि, बच्चों को पोलियो की खुराक न पिलवाने या पोलियो रोकथाम अभियानों के दौरान कई कारणों से बच्चों को खुराक के लिए सामने न लाने के कारण यह प्रकोप देखा जा रहा है। संक्रमण के ज्यादातर मामले उत्तरी वज़ीरिस्तान में रिपोर्ट किए गए हैं, यह उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में तालिबान का गढ़ भी रह चुका है। यहां अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण माता-पिता बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने से बचते हैं।
एक ब्रिटिश अखबार की रिपोर्ट में पाकिस्तान के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान में पोलियो की खुराक पिलाने को लेकर अब भी अशिक्षा भारी पड़ रही है। यहां बच्चों की उंगली पर नकली निशान लगाकर बता दिया जाता है कि उनको खुराक मिल गई है। इस तरह से टीकाकरण में हुए चूक पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम द्वारा देश को पोलियो मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी बाधा बन रही है। जून-जुलाई के महीने में पोलियो के मामलों में दर्ज किए गए उछाल के पहले बच्चों में संक्रमण के कारण लकवा का आखिरी मामला पिछले साल जनवरी में दर्ज किया गया था।
पाकिस्तान में अशिक्षा और पोलियो को लेकर मिथक बड़ी चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान दो ही ऐसे देश हैं जहां अब भी पोलियो वायरस एंडेमिक स्टेज में है। पाकिस्तान में टीकाकरण विरोधी भावनाओं की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहां के लोगों में मिथक फैलाया गया है कि टीके बच्चों की नसबंदी करने के लिए पश्चिमी देशों की साजिश का हिस्सा हैं। कुछ ऐसे मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं जहां पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलवाने के कारण पति ने तलाक तक दे दिया है।
समय-समय पर पाकिस्तान में पोलियो को लेकर अफवाहें फैलती रही हैं। अप्रैल 2019 में लोगों ने अफवाह उड़ा दी कि पोलियो की खुराक के कारण बच्चे में बेहोशी और उल्टी की दिक्कत हो रही है। इसके कारण उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर लंबे समय तक दहशत का मौहाल देखने को मिला था।
अमेरिका-ब्रिटेन में भी मिले वायरस
दुनिया के अन्य हिस्सों में संक्रमण की स्थिति
सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, कई पश्चिमी देशों में भी पिछले कुछ महीनों में पोलियो के वायरस की पुष्टि हुई है। पोलियो के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच यरुशलम, न्यूयॉर्क और लंदन के कुछ हिस्सों में पोलियो का वायरस पाया गया है। अब सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान में अगर अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण पोलियो आउटब्रेक हुआ है तो फिर इन देशों में संक्रमण की पुष्टि के क्या कारण हैं?
इस बारे में पोलियो उन्मूलन का अध्ययन करने वाले कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्कॉट बैरेट ने एक रिपोर्ट में बताया कि हम मूल रूप से पोलियो की वैक्सीन में कुछ बदलाव नोटिस कर रहे हैं, संभवत: वायरस में म्यूटेशन के कारण नए मामले देखे जा रहे हैं, हालांकि यूके और यू.एस. जैसे देश बहुत जल्दी संचरण को रोकने में सक्षम होंगे। इन देशों में वायरस ज्यादातर मामले "वैक्सीन-ड्राइब्ड" है, जिसका अर्थ है कि ये ओरल वैक्सीन में हुए वायरस के म्यूटेटेड रूप के कारण संक्रमण दोबारा बढ़ा है।
इस साल अब तक वाइल्ड पोलियो के कुल 19 मामले सामने आए हैं, जिनमें से सभी पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मोजाम्बिक और इजराइल से हैं। इससे पहले साल 2020 में वैक्सीन से जुड़े पोलियो के 1,100 से अधिक मामले कई देशों में रिपोर्ट किए गए थे, हालांकि अब यह संख्या घटकर करीब 200 रह गई है।
इस साल की शुरुआत में इजराइल में भी पोलियो के कुछ मामले दर्ज किए गए है। इज़राइली अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में 3 साल के बच्चे में पोलियो के कारण लकवे की पुष्टि की थी, इस बच्चे का टीकाकरण नहीं हुआ था। कुछ अन्य बच्चों में भी संक्रमण रिपोर्ट किए गए थे हालांकि उनमें इसके लक्षण सामने नहीं आए थे।
ब्रिटिश अधिकारियों ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया था कि सीवेज में वायरस के संकेत मिले हैं, जिसके बाद सरकार ने घोषणा की थी कि लंदन में एक से नौ वर्ष की आयु के सभी बच्चों को बूस्टर डोज दिया जाएगा।