वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण का जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के अलावा अमेरिका में भी नए कोरोना वैरिएंट्स के कारण स्थिति बिगड़ गई है। यहां बढ़ते कोरोना के मामलों के लिए ओमिक्रॉन के XBB.1.5 वैरिएंट को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इस वैरिएंट को लेकर हुए अध्ययनों में पाया गया है कि न सिर्फ इसकी संक्रामकता दर अधिक है साथ ही इससे संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने के मामले भी अधिक देखे जा रहे हैं। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी नए वैरिएंट्स को अधिक संक्रामक बताते हुए इससे बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है।
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भारत में भी बढ़े रहे हैं मामले
XBB.1.5 वैरिएंट के मामले भारत में भी बढ़ रहे हैं। दिसंबर 2022 में इसका पहला मामला गुजरात में दर्ज किया गया था। हाल ही में उत्तराखंड से सामने आए इससे एक और संक्रमित के मामले के साथ देश में इस वैरिएंट से संक्रमितों की संख्या बढ़कर अब 8 हो गई है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बढ़ते खतरे से बचाव बहुत आवश्यक है। यह वैरिएंट न सिर्फ तेजी से फैल सकता है साथ ही इसके कारण हॉस्पिटलाइजेशन के मामले भी बढ़ सकते हैं। बहुत ही कम समय में यह वैरिएंट लगभग 30 देशों में फैल चुका है।
संक्रमितों को भर्ती होने की पड़ रही है जरूरत
आमतौर पर माना जाता रहा है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की प्रकृति भले ही अधिक संक्रामक है पर इसके कारण लोगों में गंभीर रोगों को जोखिम नहीं होता है। पर इसके विपरीत क्रैकन से प्रभावित संयुक्त राज्य अमेरिका के अस्पतालों में रोगियों की संख्या में नाटकीय रूप से वृद्धि देखी जा रही है।
एक रिपोर्ट में महामारी विज्ञानी डॉ जेम्स लॉलर कहते हैं, "अस्पतालों में नए XBB.1.5 वैरिएंट से संक्रमितों की संख्या बढ़ी है। 70 वर्ष से अधिक उम्र लोगों में इस तरह का जोखिम अधिक है पर कई हिस्सों में कम उम्र के लोगों को भी भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है।
वैरिएंट के बाइंडिंग प्रकृति
जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में वायरोलॉजिस्ट एंड्रयू पेकोज़ कहते हैं, प्रारंभिक शोध में इस नए वैरिएंट के बाइंडिंग को लेकर जो बातें पता चली हैं, वह डराती हैं। इस वैरिएंट में देखा गया म्यूटेशन इसे अधिक कुशलता से कोशिकाओं के साथ बाइंडिंग की क्षमता प्रदान करता है। इससे लोगों में संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। यह शरीर के अंगों को किस प्रकार से प्रभावित करता है, इसे समझने के लिए अध्ययन किया जा रहा है। फिलहाल ज्यादातर लोग अब भी हल्के लक्षणों वाले ही हैं।
बूस्टर वैक्सीन वाले भी हो सकते हैं शिकार
XBB और इसके सब-वैरिएंट की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं वैज्ञानिकों ने बताया है कि इसके म्यूटेशन वैक्सीन की प्रतिरक्षा से बचकर लोगों को संक्रमित करने में सफल हो रहे हैं। जिन लोगों को बूस्टर डोज लग चुका है उनमें भी संक्रमण देखा जा रहा है, जिससे स्पष्ट होता है कि XBB.1.5 वैरिएंट बूस्टर वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को भी चकमा दे सकती है। इस तरह की प्रकृति चिंता बढ़ाने वाली मानी जाती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस वैरिएंट पर सभी देशों ने समय रहते कंट्रोल नहीं पा लिया तो संभव है कि यह आने वाले दिनों में बड़े खतरे के तौर पर उभर सकती है।
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