मानसून का ये समय कई तरह की बीमारियों का जोखिम बढ़ा देता है। मौसम में बदलाव के कारण होने वाले फ्लू के संक्रमण से लेकर मच्छर जनित रोग जैसे डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा इन दिनों में काफी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसून के दौरान कई वायरस, बैक्टीरिया और अन्य रोगजनकों के संपर्क में आने का जोखिम किसी भी अन्य मौसम की तुलना में दो गुना अधिक होता है। हवा में नमी की अधिकता हानिकारक सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देती है जिससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।
Health Alert: कई दिनों से हो रहा है बुखार, कैसे जानें ये फ्लू है या डेंगू-मलेरिया की समस्या?
मानसून में होने वाली बीमारियां
डॉक्टर कहते हैं, मानसून के दिनों में बुखार आने के कई कारण हो सकते हैं। बैक्टीरियल संक्रमण जैसे टाइफाइड और लेप्टोस्पायरोसिस हो या फिर डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी, इन सब में तेज बुखार होना सबसे आम लक्षण है। टाइफाइड, डेंगू और मलेरिया जैसी स्थितियां गंभीर मानी जाती हैं, जिनका समय पर निदान और इलाज होना आवश्यक है।
पर कैसे पता लगाएं कि आपको हो रहे बुखार की क्या वजह है?
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इन्फ्लूएंजा और डेंगू का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बुखार के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए खून की जांच सबसे जरूरी है। कुछ अन्य संकेतों को ध्यान में रखकर भी ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपको हो रहे बुखार की आखिर वजह क्या है?
मौसम में बदलाव के कारण इन्फ्लूएंजा संक्रमण का खतरा काफी अधिक देखा जाता है इसमें बुखार के साथ थकान, सिरदर्द जैसे सामान्य लक्षण हो सकते हैं। जबकि डेंगू की स्थिति में बुखार की समस्या फ्लू की तुलना में काफी तेज होती है। कई लोगों को 104-105 डिग्री तक बुखार हो सकता है। इसके अलावा डेंगू के कारण आंखों के पीछे, मांसपेशियों-जोड़ों में दर्द, शरीर पर चकत्ते होने और पाचन में गड़बड़ी की समस्या भी हो सकती है। इस तरह की दिक्कतें फ्लू में कम या नहीं देखी जाती हैं।
डेंगू और मलेरिया में कैसे अंतर करें?
मानसून में कई प्रकार की मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू और मलेरिया के मामले भी काफी बढ़ जाते हैं। इन दोनों बीमारियों में भी बुखार होना सबसे आम लक्षण है। डेंगू और मलेरिया में कई प्रकार के अंतर हैं जिससे इसका पता लगाया जा सकता है।
मलेरिया की समस्या में ठंड लगने के साथ तेज बुखार होता है और शाम को बुखार बढ़ जाता है। कुछ लोगों को कमजोरी और ब्लड शुगर के स्तर में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है। जबकि डेंगू में बुखार के साथ जोड़ों, मांसपेशियों और सिर में दर्द होता है। इसके अलावा इसमें पेट में गड़बड़ी और त्वचा पर चकत्ते की समस्या हो सकती है जो मलेरिया में नहीं देखी जाती है। डेंगू में मलेरिया रोगियों जैसी ठंड लगने की दिक्कत भी नहीं होती है।
क्या कहते हैं डॉक्टर्स?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसून के दिनों में सेहत को लेकर अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। संक्रामक रोग आपके लिए गंभीर दिक्कतों का कारण बन सकते हैं। डेंगू-मलेरिया जैसी समस्याओं के कारण अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लगती है। मच्छरों के काटने से बचाव के उपाय करें साथ ही बुखार जैसी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दें।
अगर आपको दो-तीन दिनों से तेज बुखार, शरीर-जोड़ों में दर्द की समस्या बनी हुई है और ये पेरासिटामोल जैसे सामान्य दवाओं से ठीक नहीं हो रही है तो डॉक्टर से मिलकर खून की जांच जरूर कराएं। डेंगू का समय पर इलाज जरूरी है वरना इससे रक्तस्राव और प्लेटलेट्स में कमी का खतरा हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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