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Swarna Bhasma: हृदय के लिए टॉनिक का काम करती है ये औषधि, इम्युनिटी और हड्डियां भी होती हैं मजबूत

Sat, 18 Oct 2025 05:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 18 Oct 2025 05:51 PM IST
सार

  • आयुर्वद के विशेषज्ञ कहते हैं, सदियों से चिकित्सा पद्धति में स्वर्ण भस्म का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हृदय को स्वस्थ रखने के साथ शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए इसके विशेष लाभ हैं। 

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स्वर्ण भस्म के फायदे (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com

Ayurveda: भारतीय चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद का महत्वपूर्ण स्थान है। सदियों से कई प्रकार की बीमारियों के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधियों को प्रयोग में लाया जाता रहा है। समय के साथ कई जड़ी-बूटियों और औषधियों को आयुर्वेद के साथ-साथ मेडिकल साइंस ने भी प्रमाणिकता दी है।



हृदय रोगों से लेकर डायबिटीज, जोड़ों के दर्द को दूर करने से लेकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने तक के लिए तमाम प्रकार की औषधियों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। कोरोना काल के दौरान इम्युनिटी बढ़ाने के लिए गिलोय, तुलसी जैसी औषधियों का आपने भी जरूर सेवन किया होगा।

स्वर्ण भस्म भी एक ऐसी ही कारगर औषधि है जिसे विशेषज्ञों ने सेहत के लिए अमृत बताया है। स्वर्ण भस्म, शुद्ध सोने के भस्म से बना एक आयुर्वेदिक मिश्रण है इसके लाभ पारंपरिक प्रथाओं और उपाख्यानों पर आधारित हैं। आइए जानते हैं कि स्वर्ण भस्म के क्या लाभ हो सकते हैं?

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आयुर्वेदिक औषधियों के लाभ (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik

आयुर्वेद में स्वर्ण भस्म के कई लाभ का जिक्र

आयुर्वेद विशेषज्ञ कहते हैं, सदियों से चिकित्सा पद्धति में स्वर्ण भस्म का कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, हृदय को स्वस्थ रखने के साथ शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए इसके विशेष लाभ हैं। 

स्वर्ण भस्म शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद सूक्ष्म तत्व शरीर की कोशिकाओं को एक्टिव करते हैं जिससे संक्रमण, एलर्जी और वायरल बीमारियों से बचाव होता है। आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरक संहिता’ में इसे ओजवर्धक यानी जीवन शक्ति बढ़ाने वाला बताया गया है। अध्ययनों के अनुसार स्वर्ण भस्म में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो फ्री रेडिकल्स से शरीर को बचाते हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्वर्ण भस्म का सेवन हमेशा आयुर्वेदाचार्य की देखरेख में ही करना चाहिए। गलत मात्रा या अशुद्ध भस्म शरीर को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है।

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हृदय रोग और दिल के धड़कनों को कैसे ठीक रखें? - फोटो : Adobe Stock Images

हृदय के लिए बहुत लाभकारी

स्वर्ण भस्म को हृदय के लिए टॉनिक के रूप में भी जाना जाता है, इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा में हृदय संबंधी तमाम विकारों को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्त संचार को बढ़ाने और  धमनियों में जमा फैट को कम करने में इससे विशेष लाभ पाया जा सकता है। आयुर्वेद में इसे “हृदय बल्य” यानी हृदय को बल देने वाली औषधि बताया गया है।

चूंकि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं इसलिए ये हृदय की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक है। 

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तनाव-स्ट्रेस से कैसे बचें - फोटो : Freepik.com

मानसिक शांति में भी मिलता है लाभ

याददाश्त शक्ति बढ़ाने, एकाग्रता और मानसिक शांति के लिए भी ये काफी प्रभावी हो सकती है। स्वर्ण भस्म में मौजूद सूक्ष्म स्वर्ण तत्व तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करते हैं और न्यूरॉन कनेक्टिविटी को सुधारते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये मस्तिष्क को पोषित करने वाला तत्व है। अध्ययनों में पाया गया है कि स्वर्ण भस्म के सेवन से तनाव, चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। जिन लोगों को अक्सर मानसिक थकान की समस्या बनी रहती है उनके लिए भी ये बहुत कारगर हो सकता है।

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इम्युनिटी बढ़ाने के क्या उपाय हैं? - फोटो : Adobe stock photos

स्वर्ण भस्म के इन फायदों को भी जानिए

  • विशेषज्ञों का मानना है कि स्वर्ण भस्म कैल्शियम और खनिजों के अवशोषण को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे हड्डियां और जोड़ मजबूत बनते हैं।
  • आयुर्वेद में इसे वात दोष में फायदेमंद बताया गया है यानी यह आर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं को कम करता है। 
  • स्वर्ण भस्म शरीर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने की क्षमता वाला है। कोशिकाओं को बढ़ावा देने और उन्हें स्वस्थ बनाए रखने के साथ उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता रहा है।
  • चरक संहिता के अनुसार, इसके नियमित सेवन से त्वचा में निखार, ऊर्जा में वृद्धि और यौन स्वास्थ्य में सुधार होता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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