कोविड-19 के मामले भले ही दुनियाभर में फिलहाल काफी कंट्रोल में हों पर इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का जोखिम अब भी लोगों को परेशान कर रहा है। लॉन्ग कोविड यानी संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी बनी रहने वाली स्वास्थ्य समस्याएं कई लोगों में एक साल बाद तक भी देखी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह गंभीर चिंता वाले संकेतक हैं। लॉन्ग कोविड की समस्या में लोगों में कमजोरी-थकान, सांस की दिक्कत, हृदय रोगों की समस्या और कई लोगों में तो एक साल से अधिक समय के बाद तक अब भी स्वाद-गंध न आने की दिक्कत देखी जा रही है।
Covid-19: लॉन्ग कोविड की ये समस्या कैंसर और स्ट्रोक रोगियों से कहीं ज्यादा गंभीर, स्वाद-गंध भी नहीं हुई ठीक
लॉन्ग कोविड की समस्याएं
लॉन्ग कोविड रोगियों पर किए गए इस अध्ययन की रिपोर्ट को बीएमजे ओपन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि लॉन्ग कोविड को कम से कम 12 सप्ताह तक बनी रहने वाली समस्याओं के रूप में वर्गीकृत किया है, हालांकि ये एक साल से अधिक समय तक भी रह सकता है। इसमें ज्यादातर रोगियों ने थकान के अलावा सांस फूलने, चिंता-अवसाद और ब्रेन फॉग जैसी समस्याओं के बारे में जानकारी दी।
अध्ययन में क्या पता चला?
शोधकर्ताओं ने यूनाइटेड किंगडम में 3,754 लोगों के डेटा की जांच की, लगभग सभी लोग 18-65 वर्ष की आयु के बीच थे, इनमें 71% महिलाएं थीं। अध्ययन के दौरान नियमित रूप से रोगियों से लक्षणों और कार्य करने की उनकी क्षमता के बारे में पूछा गया।
2020 से मार्च 2022 तक चले इस शोध में 50 फीसदी लोगों ने कहा कि संक्रमण से ठीक होने के बाद पहले महीने में वह एक दिन भी काम नहीं कर पाए वहीं 5 में से 1 व्यक्ति ने कहा कि वे अब भी बिल्कुल भी काम करने में असमर्थ हैं।
कैंसर में होने वाली थकान से गंभीर हैं कोविड-19 की कमजोरी
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर और शोधकर्ता विलियम हेनले कहते हैं, "लॉन्ग कोविड एक अदृश्य स्थिति है। चौंकाने वाली बात यह है कि हमारे शोध से पता चला है कि इसके दुष्प्रभाव, विशेषकर रोगियों में देखी जा रही थकान-कमजोरी की समस्या, कैंसर-स्ट्रोक वाले रोगों को होने वाली कमजोरी से कहीं ज्यादा गंभीर है। कई लोगों में एक साल से अधिक समय तक भी कमजोरी-थकान की दिक्कत बनी हुई है जो सीधे तौर पर उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ को बिगाड़ने वाली हो सकती है।
लॉन्ग कोविड को न करें अनदेखा
शोधकर्ता कहते हैं, कोविड-19 को भले ही अब इग्नोर किया जा रहा है पर इसके लॉन्ग टर्म साइड इफेक्ट्स को अनदेखा नहीं किया जा सकता। थकान के साथ बड़ी संख्या में सालभर बाद भी लोगों में स्वाद-गंध न आने की दिक्कत बनी हुई है। लॉन्ग कोविड, असल में कोविड-19 के उस दौर जितना ही चुनौतीपूर्ण है जिसमें अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही थी। फर्क ये है कि कोविड-19 को गंभीरता से लिया जा रहा था जबकि लॉन्ग कोविड पर ज्यादा ध्यान नहीं है, ये स्थिति को और भी बिगाड़ने वाली हो सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
Impact of fatigue as the primary determinant of functional limitations among patients with post-COVID-19 syndrome: a cross-sectional observational study
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