Liver Disease Risk Factors: ये कहना गलत नहीं होगा कि हम खुद ही अपने शरीर का दुश्मन बनते जा रहे हैं। हाल के वर्षों में जिस तरह से लाइफस्टाइल और खानपान में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, ये काफी चिंताजनक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र के लोग भी क्रॉनिक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, ये और भी खतरनाक स्थिति है। अगर ये ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले तीन-चार दशकों में देश की बड़ी आबादी रोगग्रस्त हो सकती है, जिसके कारण न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका है, साथ ही ये देश के आर्थिक विकास को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
Liver Disease: लिवर रोगों की 'महामारी' का अलर्ट, डॉक्टरों ने बताई वो आदत जिससे बढ़ रहा है खतरा
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार हर साल करीब 20 लाख लोग लिवर से जुड़ी बीमारियों से जान गंवा देते हैं।
- कैंसर और हृदय रोगों के बढ़ते मामले पहले से ही टेंशन बढ़ा रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अब लिवर रोगों की महामारी को लेकर भी लोगों को सावधान किया है।
बढ़ रहे हैं लिवर रोगों के मामले
तमाम अध्ययनों से पता चलता है कि हाल के वर्षों में लिवर रोगों में तेजी से वृद्धि हुई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि लिवर को सबसे ज्यादा नुकसान शराब की आदत के कारण हो रहा है, जिसमें थोड़ी मात्रा में भी शराब पीना शामिल है।
लिवर रोगों को लेकर शोध कर रहे अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि शराब पीने की आदत को जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सबसे खतरनाक पाया गया है। अगर इसपर ध्यान न दिया गया तो आने वाले दशकों में दुनिया का बड़ा आबादी लिवर रोगों को शिकार हो सकती है, ये महामारी की स्थिति होगी।
अल्कोहल लिवर का दुश्मन
लिवर का स्वस्थ रहना, इंसानों के जीवित रहने के लिए अति आवश्यक है। लिवर मेटाबॉलिज्म और भोजन के भंडारण में योगदान देता है, प्रोटीन का उत्पादन करता है जो रक्त के थक्के बनाने में मदद करते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अल्कोहल एक विषैला पदार्थ है जिसका मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से लिवर में होता है। अक्सर या अधिक मात्रा में अल्कोहल लिवर की कोशिकाओं में सूजन बढ़ाने और गंभीर स्थितियों में उन्हें क्षतिग्रस्त करने के लिए जिम्मेदार पाया गया है। समय के साथ, सूजन या क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के कारण फाइब्रोसिस हो सकता जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सिरोसिस या लिवर फेलियर की समस्या हो सकती है।
सिरोसिस अपने आप में घातक है और लिवर कैंसर का कारण भी बन सकता है।
शराब लिवर की बीमारी में कैसे योगदान देती है?
शराब से होने वाली लिवर की बीमारी को अल्कोहल-रिलेटेड लिवर डिजीज कहा जाता है। प्रमाण बताते हैं कि कम मात्रा में भी लंबे समय तक शराब का सेवन लिवर के कार्य को प्रभावित कर सकता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।
पिछले दो दशकों में कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका में लिवर की बीमारियों से होने वाली मौतों में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है। अध्ययनों में पाया गया कि इसका प्रमुख कारण इसी अवधि के दौरान शराब का बढ़ा हुआ सेवन है।
भारतीय आबादी में फैटी लिवर के बढ़ते मामले
जुलाई 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ जीतेंद्र सिंह ने एक कार्यक्रम में बताया कि देश में हर तीसरे व्यक्ति को फैटी लिवर डिजीज हो सकती है।
फैटी लीवर रोग से पीड़ित लोगों को शराब का सेवन बिल्कुल न करने की सलाह दी जाती है। हालांकि शराब न पीने वालों में भी फैटी लिवर की समस्या होने का खतरा रहता है। इसलिए लाइफस्टाइल में सुधार करना भी आवश्यक है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र से ही सभी लोगों को अपनी लिवर की सेहत को लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है। लाइफस्टाइल में सुधार के साथ अल्कोहल से बिल्कुल दूरी बनाना इसके लिए बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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