मोबाइल हम सभी के जीवन का जरूरी हिस्सा बन गया है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात में सोने जाने से पहले तक हम सभी किसी न किसी वजह से मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहते हैं।
सेहत की बात: क्या हमारे ब्रेन में भी बदलाव करने लगा है मोबाइल? लोगों में देखी जा रही हैं ये समस्याएं
मोबाइल का जरूरत से ज्यादा और खासकर रात में इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। शोध में स्क्रीन टाइम के कारण सोने में समस्या, अनिद्रा के लक्षण और नींद आने में परेशानी का कारण बताया गया है।
मोबाइल का ब्रेन पर क्या असर हो रहा है?
मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल यानी स्क्रीन टाइम और इससे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरों को लेकर हालिया शोध में पाया गया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम नींद की समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।
- इससे अनिद्रा के लक्षण, देर से सोने और नींद आने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- विश्लेषण में हर अतिरिक्त घंटे के स्क्रीन टाइम के कारण रात में सोने का समय में औसतन करीब 13 मिनट आगे बढ़ने की दिक्कत पाई गई है।
- रात में देर से सोना या फिर कम सोना, दोनों को ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरे बढ़ाने वाला माना जाता रहा है।
नींद की कमी से फोकस और याददाश्त पर असर
- नींद सिर्फ शरीर को आराम देने के लिए नहीं है। यह दिमाग की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए भी जरूरी है। अगर आप देर रात तक मोबाइल चलाते रहते हैं तो इससे नींद का समय घटता है या नींद बार-बार टूटती है। इसका असर अगले दिन थकान और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी समस्याओं के रूप में सामने आ सकता है।
- विशेषज्ञ कहते हैं ये तो प्रमाणित नहीं होता है कि मोबाइल सीधे तौर पर हमारी याददाश्त को कम कर देता है, हालांकि शोध में ये देखा गया है कि स्क्रीन टाइम बढ़ने से संज्ञानात्मक क्षमताएं कम हो सकती हैं। मसलन मोबाइल सीधे तौर पर तो हमारे ब्रेन को नहीं बदल रहा है बल्कि ज्यादा देर तक मोबाइल देखते रहने से कई ऐसी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं जिसके चलते समय के साथ दिमागी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
इससे बचें कैसे?
अब सवाल ये है कि फिर अपने ब्रेन हेल्थ को ठीक कैसे रखा जाए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए इसे आराम देने की जरूरत होती है, जिसके लिए अच्छी नींद जरूरी है। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से नींद की समस्याएं बढ़ रहा हा ऐसे में आपको आदतों में कुछ बदलाव करना चाहिए।
- सोने का समय तय करें और बिस्तर पर लंबे समय तक फोन चलाने से बचें। नोटिफिकेशन कम करें और बिना काम के लगातार स्क्रॉल करने की आदत पर रोक लगाएं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के एक सर्वे में 87% वयस्कों ने बताया था कि वे नियमित रूप से अपने बेडरूम में फोन चलाते रहते हैं, इस आदत में बदलाव करके आप कई तरह के लाभ पा सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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