कोरोना को मात देने के लिए दुनिया के कई देशों में टीकाकरण अभियान बड़े ही जोरों-शोरों पर चल रहा है। इस लिस्ट मे अब भारत का नाम भी जुड़ चुका है, जहां कोवैक्सीन और कोविशील्ड वैक्सीन का टीका लगाया जा रहा है। इन दोनों ही वैक्सीन की चर्चा भारत ही नहीं पूरी दुनिया में हो रही है। लेकिन इन सबके बीच चीन की दवा कपंनी साइनोवैक और साइनोफार्म द्वारा बनाई गई दो वैक्सीन कोरोनावैक और साइनोफार्म काफी चर्चा में हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन दोनों वैक्सीन ने काफी नाम कमा लिया है। लेकिन हम इन वैक्सीन के बारे में कितना जानते हैं। तो चलिए जानते हैं इनके बारे में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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दरअसल, कोरोनावैक वैक्सीन वायरस के कणों को मार देती है ताकि शरीर का इम्यू सिस्टम वायरस के खिलाफ काम करना शुरू कर दें। मॉडर्ना और फाइजर वैक्सीन से अगर इसकी तुलना की जाए तो इसमें वैक्सीन कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के हिस्सों को शरीर में डाला जाता है जो कि शरीर में जाकर वायरल प्रोटीन को सक्रिय करते हैं। चीन की इस वैक्सीन को दो से आठ डिग्री सेल्सियस पर सुरक्षित रखा जा सकता है। कोरोनावैक वैक्सीन के असर की बात की जाए, तो अभी ये कह पाना मुश्किल होगा कि ये कितनी असरदार है।
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हालांकि, साइंस जर्नल 'द लैंसेट' में छपे एक चीनी शोध के अनुसार इस वैक्सीन के पहले और दूसरे ट्रायल के बारे में ही जानकारी सार्वजनिक है। इस शोध के एक लेखक सू फांगसै कहते हैं कि पहले चरण में 144 और दूसरे चरण में 600 लोगों पर इसका ट्रायल हुआ। इसके परिणाम ये बताते हैं कि ये वैक्सीन आपातकालीन इस्तेमाल के लिए उचित है। कोरोनावैक का तीसरे चरण का ट्रायल कई देशों में जारी है, और आखिरी ट्रायल का जो अंतरिम डाटा आया है उसमें तुर्की में 91.25 फीसदी और इंडोनेशिया में इसे 65.3 फीसदी असरदार पाया गया है।
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कोरोना वायरस वैक्सीन
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वहीं, बात चीन की दूसरी वैक्सीन की करें तो चीन की सरकारी कंपनी साइनोफार्म दो कोरोना वैक्सीन को विकसित करने पर काम कर रही है। ये भी कोरोनावैक जैसी यानी इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है। कंपनी ने 30 दिसंबर को अपने तीसरे चरण के ट्रायल में बताया था कि ये वैक्सीन 79 फीसदी असरदार है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने इस महीने की शुरुआत में साइनोफार्म वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति दे दी थी और इसे तीसरे चरण के ट्रायल के अंतरिम परिणामों के आधार पर 86 फीसदी असरदार बताया था। द कन्वर्सेश में छपे एक लेख के मुताबकि, चीन कम से कम और दो अन्य वैक्सीन पर काम कर रहा है।
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चीन से कई देश वैक्सीन ले भी रहे हैं, जिनमें मलेशिया, सिंगापुर और फिलीपींस जैसे कई एशियाई देश शामिल है। इन सभी ने साइनोवैक के साथ समझौता किया है। इसी महीने जनवरी से इसी वैक्सीन का बड़ा टीकाकरण अभियान इंडोनेशिया ने अपने वहां शुरू कर दिया है। साथ ही बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने साइनफार्म वैक्सीन को अनुमति दे दी है। यही नहीं, तुर्की ने भी साइनोवैक वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दे दी है।