अधिक वजन या मोटापा की समस्या, स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंताकारक स्थिति हो सकती है। इसे कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का कारक भी माना जाता है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया, जिन लोगों का वजन सामान्य से अधिक होता है उनमें डायबिटीज, हृदय रोग और हार्ट अटैक जैसी क्रोनिक बीमारियों और जानलेवा समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है।
चिंताजनक: तीन दशकों में चार गुना से अधिक बढ़ गई मोटापे की समस्या, 'क्रोनिक बीमारियों की महामारी' का अलर्ट
अध्ययन में क्या पता चला?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अन्य सहयोगियों के साथ इस वैश्विक डेटा के विश्लेषण में अनुमान लगाया है कि दुनियाभर के बच्चों-किशोरों में साल 1990 की तुलना में 2022 में, यानी तीन दशकों में मोटापे की दर चार गुना बढ़ गई है। वयस्क आबादी में, महिलाओं में मोटापे की दर दोगुनी और पुरुषों में लगभग तीन गुना से अधिक हो गई।
अध्ययन के अनुसार साल 2022 में 159 मिलियन (15.9 करोड़) बच्चे-किशोर और 879 मिलियन (87.9 करोड़) वयस्क मोटापे के शिकार पाए गए हैं।
कुपोषण का जोखिम
रिपोर्ट के मुताबिक साल 1990 से 2022 के बीच, विश्वभर में कम वजन से प्रभावित बच्चों और किशोरों का अनुपात लड़कियों में लगभग पांच हिस्सा और लड़कों में एक तिहाई से अधिक कम हो गया है। इसी अवधि में कम वजन के कारण प्रभावित वयस्कों का अनुपात भी आधे से भी अधिक कम हुआ है।
गौरतलब है कि मोटापा और कम वजन, दोनों ही कुपोषण के रूप हैं और कई मायनों में लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। नवीनतम अध्ययन पिछले 33 वर्षों में कुपोषण के दोनों रूपों और इसके कारण होने वाले संभावित जोखिमों को लेकर अलर्ट करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से लोगों में अधिक वजन की समस्या बढ़ी है, ये क्रोनिक बीमारियों की महामारी का भी संकेतक माना जा सकता है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
ब्रिटेन में इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर और अध्ययन के लेखक माजिद इज्जती कहते हैं, यह बहुत चिंताजनक है कि मोटापे की समस्या जो 1990 में दुनिया के अधिकांश हिस्सों में वयस्कों में ही अधिक देखी जा रही थी, अब स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों को भी अपना शिकार बना रही है। करोड़ों लोग अभी भी कुपोषण से प्रभावित हैं, खासकर दुनिया के कुछ सबसे गरीब हिस्सों में। कुपोषण के दोनों रूपों के कारण कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।
अध्ययन में पाया गया है कि 1990 से 2022 तक, वैश्विक मोटापे की दर लड़कियों और लड़कों में चार गुना से अधिक हो गई है, ये वृद्धि लगभग सभी देशों में देखी जा रही है।
गंभीर बीमारियों की महामारी का जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन दिनों दुनियाभर में जिन बीमारियों के कारण मौत का जोखिम और स्वास्थ्य जटिलताएं सबसे ज्यादा बढ़ती हुई पाई गई हैं, उनमें से अधिकतर के लिए अधिक वजन की समस्या को ही प्रमुख कारण माना जाता है। बच्चों में मोटापे की स्थिति और भी गंभीर समस्याकारक हो सकती है, इसका सीधा असर उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ को प्रभावित करने वाला होता है।
हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले हों या बढ़ती डायबिटीज की दिक्कत इन सभी के कोर में मोटापा बड़ा कारक है। अगर इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो ये बड़ी बीमारियों के 'महामारी' के खतरे का अलर्ट हो सकता है।
--------------
स्रोत और संदर्भ
Worldwide trends in underweight and obesity from 1990 to 2022: a pooled analysis of 3663 population-representative studies with 222 million children, adolescents, and adults
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।