क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है कि आपके मसूड़े बीमार तो नहीं। दरअसल मसूड़ों की बीमारी जितनी सामान्य है, उतनी ही परेशान करने वाली भी है। इसकी शुरुआत जिंजिवाइटिस से होती है। इस दौरान मसूड़ों में सूजन आ जाती है और उनसे खून बहने लगता है। खून ब्रश या फ्लॉस करते समय या फिर यूं ही निकल सकता है। मसूड़ों की जांच कराते वक्त यदि खून आता है तो यह भी जिंजिवाइटिस का लक्षण है।
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मसूड़ों में दर्द तो हो जाएं सतर्क, शुरुआती लक्षणों को पहचानें, वरना बढ़ जाएगी समस्या
Sat, 31 Aug 2019 04:41 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 31 Aug 2019 04:41 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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डॉ लक्ष्य यादव
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इस बीमारी का अगला चरण है पेरिओडोन्टाइटिस। इसमें दांतों को मजबूती देने वाली चीजें, जैसे मसूड़ों के ऊतक और हड्डियां खराब होने लगते हैं। शुरुआत में इसका पता नहीं चलता, जब यह फैल जाती है तभी मालूम होती है। इसके लक्षण हैं जैसे मसूड़ों में जगह या गम पॉकेट बनना, दांतों का हिलना, दांतों के बीच जगह बनना, मुंह से बदबू आना, मसूड़ों का दांतों से अलग होना, जिससे दांतों का लंबा दिखाई देना और मसूड़ों सेे खून बहना। क्या करें और क्या न करें, बता रहे हैं केजीएमयू के प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग के डॉक्टर लक्ष्य यादव।
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मसूड़ों की बीमारी के कई कारण हैं। जैसे दांतों पर मैल या प्लाक का जमना। यह बैक्टीरिया की पतली परत होती है, जो दांतों पर लगातार जमती रहती है। इसे साफ न किया जाय तो जीवाणु मसूड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं। आगे चलकर इससे मसूड़े दांतों से अलग होने लगते हैं। नतीजा मसूड़ों के नीचे मैल बढ़ने लगती है। एक बार जब जीवाणु यहां इकट्ठा हो जाते हैं तो मसूड़ों की सूजन हड्डी और ऊतकों को गलाने लगती है।
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प्लाक जब मजबूत हो जाता है तो पत्थर की तरह सख्त हो जाता है, जिसे कैलकुलस कहते हैं। यह दांतों से चिपका रहता है, जिसे हटाया नहीं जा सकता। यही वजह है कि बैक्टीरिया मसूड़ों को सड़ाते रहते हैं। इसके अलावा मुंह, दांत व मसूड़ों की अच्छे से सफाई न होने, लगातार दवाइयां खाने, वायरल इंफेक्शन, तनाव, शुगर, ज्यादा शराब पीने, तंबाकू का सेवन करने से भी हमारे मसूड़े प्रभावित होते हैं।
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सावधानी ही एकमात्र बचाव है। दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें। ब्रश एकदम मुलायम होने चाहिए। हर दिन सावधानी से दांतों व मसूड़ों की सफाई करें। वयस्कों के लिए तो छह महीने पर दांतों की जांच कराने का प्रोटोकॉल है यानी सभी को छह महीने में एक बार दांतों का परीक्षण जरूर कराएं। विटामिन सी का सेवन जरूर करें। सबसे ज्यादा विटामिन सी अमरूद में होता है। बच्चा यदि मुंह खोलकर सोता है या अंगूठा चूसता है तो उसे दांत जरूर डॉक्टर को दिखाएं। फल साबुत खाएं और बच्चों को भी खाने की आदत डालें। यानी सेव या अमरूद काटकर खाने के बजाय पूरा खाएं। भुट्टे के दाने अलग करके न खाएं बल्कि साबुत भुट्टा खाएं।