फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Encephalitis: जानलेवा हो सकती है जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी, बच्चों में खतरा अधिक; कैसे करें बचाव?

Sat, 20 Jul 2024 08:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 20 Jul 2024 08:31 PM IST
विज्ञापन
japanese encephalitis risk in india vaccination and prevention of encephalitis
जापानी इंसेफेलाइटिस की समस्या - फोटो : istock

बरसात का ये मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां लेकर आता है। दूषित जल के कारण पेट में होने वाले संक्रमण के साथ, मच्छरजनित बीमारियों का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। इस मौसम में देश के कई हिस्सों में  इंसेफेलाइटिस बीमारी का खतरा भी देखा जाता रहा है, इसे दिमागी बुखार के रूप में जाना जाता है। मुख्यरूप से बच्चों और बुजुर्गों को होने वाली ये बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।



इंसेफेलाइटिस मस्तिष्क में सूजन की बीमारी है। यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमणों के कारण हो सकती है। कुछ स्थितियों में प्रतिरक्षा कोशिकाओं द्वारा गलती से मस्तिष्क पर हमला करने के कारण भी ऐसा हो सकता है। मच्छरों और टिक जैसे कीड़ों के माध्यम से भी ये संक्रमण फैल सकता है।

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इंसेफेलाइटिस का ही एक रूप जापानी इंसेफेलाइटिस काफी ज्यादा रिपोर्ट की जाती रही है। हालांकि सरकार के प्रयासों से पिछले कुछ वर्षों में इसपर काफी नियंत्रण पाया गया है। इस गंभीर रोग का तुरंत निदान और उपचार करवाना महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं कि ये बीमारी क्यों इतनी खतरनाक है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

japanese encephalitis risk in india vaccination and prevention of encephalitis
जापानी इंसेफेलाइटिस में बुखार होने का खतरा - फोटो : Freepik

जापानी इंसेफेलाइटिस और इसके लक्षण

जापानी इंसेफेलाइटिस, संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। ज्यादातर संक्रमितों में हल्के लक्षण दिखते हैं हालांकि गंभीर बीमारी वालों को बुखार, सिरदर्द और उल्टी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अगर समय रहते इनपर ध्यान न दिया जाए तो इससे भ्रम, दौरे पड़ने और कोमा का खतरा भी हो सकता है। बच्चों में जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण दौरे पड़ने जैसे लक्षण अधिक देखे जाते रहे हैं। 

japanese encephalitis risk in india vaccination and prevention of encephalitis
मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी - फोटो : Freepik.com

जापानी इंसेफेलाइटिस का खतरा

अध्ययनों में पाया गया है कि ग्रामीण इलाकों जहां स्वच्छता की कमी होती है या मच्छरों के अधिक प्रजनन वाले क्षेत्रों में इस रोग का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। जिन स्थानों पर पहले से जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले अधिक हैं वहां की यात्रा करने से आपमें भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।

जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले गर्मियों और बरसात के मौसम में काफी अधिक रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है क्योंकि जिन क्षेत्रों में यह वायरस स्थानिक (एंडेमिक) है, वहां वयस्क आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ इससे प्रतिरक्षित हो जाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
japanese encephalitis risk in india vaccination and prevention of encephalitis
जापानी इंसेफेलाइटिस का मस्तिष्क पर असर - फोटो : istock

मस्तिष्क को प्रभावित करती है ये बीमारी

जापानी इंसेफेलाइटिस मस्तिष्क को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। मस्तिष्क संबंधी लक्षणों के कारण कुछ लोगों में आजीवन जटिलताएं जैसे बहरापन, अनियंत्रित भावनाओं की समस्या या शरीर के एक तरफ कमजोरी जैसी दिक्कतें बनी रह सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, घरों के आसपास स्वच्छता का ध्यान रखकर, पानी का जमाव न होने देने वाले उपाय करके, मच्छरों से बचाव करके इस खतरनाक रोग से सुरक्षित रहा जा सकता है। 

विज्ञापन
japanese encephalitis risk in india vaccination and prevention of encephalitis
जापानी इंसेफेलाइटिस वैक्सीन (सांकेतिक) - फोटो : istock

क्या जापानी इंसेफेलाइटिस के लिए कोई वैक्सीन है?

भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अप्रैल, 2013 से जापानी इंसेफेलाइटिस के स्थानिक जिलों के लिए वैक्सीन उपलब्ध कराई गई है। दो खुराक वाली वैक्सीन, पहली 9 महीने की उम्र में खसरे के साथ तथा दूसरी 16-24 महीने की उम्र में डीपीटी बूस्टर के साथ दी जाती है। बच्चों को ये टीके लगवाकर उन्हें जापानी इंसेफेलाइटिस और इसके कारण होने वाली गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

जापानी इंसेफेलाइटिस के लिए रोकथाम ही सर्वोत्तम उपचार है। स्वच्छता के उपाय और मच्छरों के काटने से बचाव करके इस घातक बीमारी से बचा जा सकता है।



-------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed