शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए नियमित रूप से हमें पोषक तत्वों से भरपूर आहार की जरूरत होती है। विटामिन्स-मिनरल्स के साथ हमें आहार के माध्यम से प्रोटीन की भी पूर्ति पर भी ध्यान देते रहना चाहिए।
जानना जरूरी: क्या आपके आहार में है प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा? इस रिपोर्ट ने भारतीयों के लिए बढ़ाई चिंता
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता कि दुनियाभर में बड़ी संख्या बहुत से लोग प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं, ये आपकी सेहत को कई तरह से प्रभावित करने वाली हो सकती है। क्या आपके आहार में है जरूरत के हिसाब से प्रोटीन?
प्रोटीन की कमी और इसका खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता कि दुनियाभर में बड़ी संख्या बहुत से लोग प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं, ये आपकी सेहत को कई तरह से प्रभावित करने वाली हो सकती है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञ कहते हैं, स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना अपने शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अगर आपका वजन 60 किलोग्राम है, तो आपको रोजाना लगभग 48–60 ग्राम प्रोटीन की जरूरत है।
कुछ स्थितियों जैसे एथलीट्स और बॉडीबिल्डर्स के लिए प्रोटीन की आवश्यकता और अधिक हो सकती है।
क्या आपके आहार में है जरूरत के हिसाब से प्रोटीन?
अब प्रश्न ये है कि क्या आपके आहार में शरीर की आवश्यकताओं के हिसाब से प्रोटीन है?
अध्ययनों से पता चलता है कि मांसाहार वाली चीजों में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती है, हालांकि शाकाहारी लोग भी आसानी से इसकी पूर्ति कर सकते हैं। अंडे और चिकन में भरपूर प्रोटीन होता है पर आप दालें और चना (अरहर, मसूर, मूंग, राजमा, काबुली चना), सोया प्रोडक्ट्स (टोफू, सोया दूध, सोया चंक्स) दूध से बने उत्पादों (दही, पनीर, छाछ) से भी इसकी आसानी से पूर्ति कर सकते हैं।
यदि आप डाइट से पर्याप्त प्रोटीन नहीं ले पा रहे हैं या शरीर को इसकी ज्यादा जरूरत है (जैसे वर्कआउट करने वालों को), तो डॉक्टर की सलाह पर प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सेवन किया जा सकता है। हालांकि प्राकृतिक स्रोतों से प्रोटीन प्राप्त करना अधिक सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है।
(ये भी पढ़िए- बॉडी बनाने के लिए आप भी तो नहीं लेते हैं प्रोटीन पाउडर? फायदे की जगह हो सकते हैं कई नुकसान)
ग्रामीण भारत में अधिकतर लोगों में प्रोटीन की कमी
इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट सहित दो अन्य संस्थानों द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में भारतीय आबादी, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के आहार में प्रोटीन की कमी को लेकर सावधान किया गया है।
जागरूकता की कमी और गरीबी के कारण लोगों को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं मिल पाता है, जोकि काफी चिंताजनक है। सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि लोगों को इसकी जरूरत के बारे में ही ज्यादा जानकारी नहीं है।
------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।